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पीएफआरडीए का प्रस्ताव, अटल पेंशन योजना के तहत स्वत: ही होगा पंजीकरण

देश में बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र हैं। करीब 83 प्रतिशत कर्मचारी असंगठित क्षेत्र हैं जहां कोई औपचारिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं है।

Author नई दिल्ली | September 9, 2016 9:14 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

बीमा नियामक पीएफआरडीए ने एक योजना का प्रस्ताव किया है जिसके तहत नियोक्ता को स्वत: अटल पेंशन योजना के तहत श्रमिकों को पंजीकृत कराना होगा। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के इरादे से यह प्रस्ताव किया गया है। पीएफआरडीए ने बीमा को दीर्घकालीन जुड़ाव का माध्यम माना। साथ ही अवधारणा पत्र में लंबे समय तक जुड़ाव को लेकर बीमा और स्वास्थ्य कवरेज को प्रोत्साहन के रूप में उपयोग करने का भी प्रस्ताव किया गया है।

देश में बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र हैं। करीब 83 प्रतिशत कर्मचारी असंगठित क्षेत्र हैं जहां कोई औपचारिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं है। साथ ही कई कर्मचारी कृषि क्षेत्र तथा चाय स्टाल जैसे छोटे-छोटे कारोबार के जरिए स्व-रोजगार में लगे हैं। इसमें ठेले, खोमचे वाले, रिक्शा चलाने वाले, घरों में काम करने वाले तथा चालक भी शामिल हैं। भारतीय पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने कहा, ‘ऐसे कर्मचारियों के लिए अनिवार्य योजना संभव नहीं है। एनपीएस लाइट या स्वाबलंबन और अटल पेंशन योजना जैसी स्वैच्छिक योजनाएं हैं जिसमें इस श्रेणी के कर्मचारियों पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है और इसको लेकर उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।’

पीएफआरडीए के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताता है कि स्वैच्छिक आधार कर्मचारियों को पेंशन देने की व्यवस्था बहुत सफल नहीं है। नियामक ने कहा, ‘इस संदर्भ में स्व-पंजीकरण का प्रस्ताव किया गया है ताकि समाज के बड़े तबके को पेंशन के दायरे में लाया जा सके….।’ ऐसी इकाइयां जहां 19 से कम कर्मचारी हैं, उन्हें सभी पूर्णकालिक श्रमिकों को एपीवाई (अटल पेंशन योजना) से स्वत: जोड़ना होगा।’ अवधारणा पत्र में कहा गया है कि एपीवाई से स्वास्थ्य तथा जीवन बीमा को जोड़ा जा सकता है। इस बारे में सात अक्तूबर तक टिप्पणी मांगी गई है।

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