EPF के मुद्दे पर झुकी सरकार, अधिसूचना रद्द, निकाल सकेंगे पूरे पैसे

केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने एलान किया कि पैसा निकालने की पुरानी व्यवस्था बनी रहेगी।

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तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

कर्मचारी भविष्य निधि से धन निकालने के नियमों को कड़े करने के खिलाफ कर्मचारियों के बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने संबंधित अधिसूचना मंगलवार को रद्द कर दिया। इस फैसले से कुछ ही घंटे पहले सरकार की ओर से कहा गया था कि वह अधिसूचना के क्रियान्वयन को तीन महीने के लिए टाल रही है।

केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि दस फरवरी 2016 को जारी अधिसूचना रद्द कर दी गई है। अब पुरानी व्यवस्था बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि मैं ईपीफएओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड से इसकी पुष्टि कराऊंगा।

संशोधित नियम को वापस लिए जाने की वजहों के बारे में बताते हुए दत्तात्रेय ने कहा- इसका कारण ट्रेड यूनियनों का अनुरोध है। भविष्य निधि से निकासी नियमों को कड़ा करने का फैसला भी ट्रेड यूनियनों की राय से लिया गया था। अब जब ट्रेड यूनियन अनुरोध कर रहे हैं, तब हमने इसे वापस ले लिया।

अधिसूचना रद्द किए जाने से पहले श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया था कि भविष्य निधि निकासी नियमों को सख्त बनाने से जुड़ी अधिसूचना लागू किए जाने का काम 31 जुलाई 2016 तक के लिए टाला जा रहा है। हम संबद्ध पक्षों के साथ इस बारे में चर्चा करेंगे। भविष्य निधि में से नियोक्ताओं के योगदान की निकासी पर कर्मचारी की आयु 58 साल होने तक के लिए पाबंदी को लेकर श्रमिक संगठनों विशेषकर कपड़ा कर्मचारी बंगलुरू में हिंसक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

मामले को ठंडा करने के इरादे से श्रम मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पास जमा पूरी राशि को मकान खरीदने, गंभीर बीमारी, शादी और बच्चों की पेशेवर शिक्षा जैसे कार्यों के लिए अंशधारकों को निकालने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। मामले को मंजूरी के लिए कानून मंत्रालय के पास भेजा गया है।

इस फैसले के खिलाफ ऑनलाइन अभियान भी चलाया गया। इसे 10 फरवरी से लागू किया जाना था लेकिन विरोध को देखते हुए इसे 30 अप्रैल तक टाल दिया गया। उधर, प्रदर्शनकारियों ने बंगलुरु में हेब्बगोदी पुलिस स्टेशन पर पत्थर फेंके और वहां खड़े वाहनों में आग लगा दी। इस प्रदर्शन का कोई ट्रेड यूनियन नेतृत्व नहीं कर रहा था।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को समझाते हुए केंद्रीय मंत्री व बंगलुरु के सांसद अनंत कुमार ने कहा कि असंगठित और कपड़ा कर्मचारियों के अधिकारों को बनाए रखा जाएगा। उन्होंने प्रदर्शन वापस लेने का भी अनुरोध किया। शहर के पुलिस आयुक्त एनएस मेघारिख ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में हैं लेकिन शहर के बाहरी भागों में कुछ मामले सामने आए हैं। पुलिस ने कहा कि कपड़ा कर्मचारियों के साथ दूसरे कर्मचारी भी जुड़ गए।

शहर के पुलिस प्रमुख के अनुसार बंगलुरु में कपड़ा फैक्टरी में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या करीब 12 लाख है। ईपीएफ कानून में संशोधन का विरोध कर रहे कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि नए नियम से भविष्य निधि में नियोक्ताओं के योगदान के ऊपर उनका अधिकार उनकी आयु 58 साल पूरे होने तक नहीं रह जाएगा।

दत्तात्रेय ने कहा कि केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक बुलाई जाएगी ताकि इस बात पर विचार किया जा सके कि ईपीएफ में नियोक्ताओं के योगदान (मूल वेतन का 3.67 फीसद) का कर्मचारियों के लिए कैसे बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि फरवरी में मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर अंशधारकों के दो महीने से अधिक बेरोजगार होने पर भविष्य निधि से 100 फीसद निकासी पर प्रतिबंध लगा दिया था। श्रम मंत्रालय के बयान के अनुसार ट्रेड यूनियनों व अन्य संबद्ध पक्षों की चिंताओं को देखते हुए मंत्रालय ने अधिसूचना 30 अप्रैल तक स्थगित रखने का फैसला किया। अब इसे 31 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है।

अब वैसे ईपीएफओ अंशधारक जो दो महीने से अधिक समय तक बेरोजगार हैं, वे जुलाई तक भविष्य निधि में जमा पूरी राशि निकालने के लिए आवेदन दे सकते हैं। श्रम मंत्रालय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पास जमा पूरी राशि को मकान खरीदने, गंभीर बीमारी, शादी और बच्चों की पेशेवर शिक्षा जैसे कार्यों के लिए अंशधारकों को निकालने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। मामले को मंजूरी के लिए कानून मंत्रालय के पास भेजा गया है। साथ ही अगर अंशधारक केंद्र या राज्य सरकार के प्रतिष्ठान से जुड़ता है और योगदान वाले भविष्य निधि या पेंशन योजना से जुड़ते हैं तो उन्हें भविष्य निधि से पूरी राशि निकालने की अनुमति होगी।

यूनियन पीएफ निकासी नियमों को कड़ा किए जाने के फैसले को पूरी तरह से वापस लिए जाने की मांग कर रही हैं। इससे पहले फरवरी में ईपीएफओ ने ईपीएफ योजना 1952 में संशोधन करते हुए भविष्य निधि निकासी के लिए नियमों को कड़ा कर दिया था। इसमें ऐसे दावों के लिए आवेदन करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आयु सीमा 54 वर्ष से बढ़ा कर 58 साल करना शामिल हैं। ईपीएफओ ने अंशधारक के दो महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहने की स्थिति में भविष्य निधि निकासी को कर्मचारी के अपने योगदान और उस पर अर्जित ब्याज तक सीमित कर दिया था। नियोक्ता के योगदान को परिपक्वता के बाद ही निकाला जा सकता है।

क्या है मामला
फरवरी में श्रम मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर अंशधारकों के दो महीने से अधिक बेरोजगार होने पर भविष्य निधि से सौ फीसद निकासी पर प्रतिबंध लगाया था। मंत्रालय ने इस अधिसूचना को 30 अप्रैल तक स्थगित कर दिया था। फिर श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने मंगलवार को पहले कहा था कि भविष्य निधि निकासी नियमों को सख्त बनाने से जुड़ी अधिसूचना लागू किए जाने का काम 31 जुलाई 2016 तक के लिए टाला जा रहा है। देर रात उन्होंने इस मसले पर फिर कहा और इस बार उन्होंने अधिसूचना के रद्द होने की जानकारी दी।

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