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पेट्रोल 65 पैसे सस्ता, डीजल पर फैसला टला

नई दिल्ली। तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम मंगलवार आधी रात से 54 पैसे प्रति लीटर (दिल्ली में वैट सहित 65 पैसे) घटा दिए हैं। लेकिन डीजल के दाम में पिछले पांच साल में पहली बार संभावित कटौती को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका से लौटने तक के रोक दिया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की […]

Author October 1, 2014 08:40 am
दिल्ली में अब पेट्रोल का दाम 66.29 रुपए लीटर हो जाएगा, जो अभी 63.16 रुपए लीटर है। इसी तरह डीजल 49.57 से बढ़कर 52.28 रुपए लीटर हो जाएगा।

नई दिल्ली। तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम मंगलवार आधी रात से 54 पैसे प्रति लीटर (दिल्ली में वैट सहित 65 पैसे) घटा दिए हैं। लेकिन डीजल के दाम में पिछले पांच साल में पहली बार संभावित कटौती को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका से लौटने तक के रोक दिया गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने इससे पहले 16 सितंबर को लागत बढ़ने के बावजूद दाम नहीं बढ़ाए थे, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम नीचे आने के बाद इसमें कटौती की है। मंगलवार आधी रात के बाद से पेट्रोल के दाम मूल्य वर्धित कर (वैट) शामिल किए बिना 54 पैसे लीटर कम किए गए हैं। इस कटौती के साथ दिल्ली में वैट सहित पेट्रोल का दाम 65 पैसे लीटर घटकर 67.86 रुपए लीटर होगा। मुंबई में वैट सहित पेट्रोल का दाम 68 पैसे घटकर 75.73 रुपए लीटर रह जाएगा। इससे पहले 31 अगस्त को पेट्रोल के दाम में 1.50 रुपए लीटर कटौती की गई थी। दिल्ली में वैट सहित यह कटौती 1.82 रुपए लीटर रही।

बहरहाल, डीजल के दाम में कटौती को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका से लौटने तक रोक दिया गया। यह कटौती यदि होती है तो जनवरी 2009 के बाद पहली बार डीजल के दाम कम होंगे। केंद्र सरकार ने इससे पहले जनवरी, 2013 में डीजल के दाम में हर महीने 40 से 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि का फैसला किया था। मंत्रिमंडल के इस फैसले को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय को लगता है कि वह अपने स्तर पर डीजल के मामले निर्णय नहीं कर सकता। पेट्रोल के दाम नियंत्रण मुक्त हैं। इसलिए इसमें सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम नीचे आने के साथ ही डीजल के दाम में होने वाला नुकसान कम हुआ है। 16 सितंबर को तो इसमें 35 पैसे का लाभ होने लगा था। इस समय डीजल का दाम उसकी लागत से एक रुपया ऊंचा है।

समझा जाता है कि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। मंत्रालय ने चुनाव आयोग को भी लिखा है और महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव को देखते हुए दाम घटाने को लेकर आयोग की अनुमति मांगी है। सूत्रों के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि 17 जनवरी, 2013 को मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने डीजल के दाम में नुकसान को खत्म करने के लिए हर महीने 40-50 पैसे वृद्धि का फैसला किया था। तब यह अनुमान नहीं था कि इसमें लागत से अधिक वसूली भी हो सकती है। मंत्रालय का कहना है कि वह डीजल के दाम में कटौती करना चाहता है ताकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के बाजार हिस्से को बरकरार रखा जा सके। क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में निजी क्षेत्र की कंपनियां सस्ते में डीजल बेचकर बाजार हिस्से पर काबिज हो सकती हैं। डीजल के दाम में इससे पहले 29 जनवरी 2009 को दो रुपए की कटौती की गई थी। नई कटौती यदि होती है तो यह पांच साल में पहली बार होगी।

 

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