पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे कच्चे तेल को लेकर चिंता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही लोगों से सोना और विदेशी यात्रा पर खर्च कम करने की अपील कर चुके हैं। इसी बीच आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा हैं कि हालात नहीं सुधरे तो भारत को ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। ईरान युद्ध से देश के एनर्जी इंपोर्ट, महंगाई की संभावना और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है।

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल कंज्यूमर इस लड़ाई से बुरी तरह प्रभावित हुआ है, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से जरूरी एनर्जी इंपोर्ट का फ्लो रुक गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और कुकिंग गैस की कमी हो गई है।

ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को स्विट्जरलैंड में स्विस नेशनल बैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की एक कॉन्फ्रेंस में मल्होत्रा ​​ने कहा, “अगर यह लंबे समय तक चलता है, तो यह बस कुछ समय की बात है कि सरकार कीमतों में हुई कुछ बढ़ोतरी को आगे बढ़ाएगी।”

आरबीआई गवर्नर ​​ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी पहले ही कम कर दी गई थी, जबकि सरकारी फ्यूल रिटेलर्स लड़ाई जारी रहने के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को झेलते रहे।

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की एनर्जी सप्लाई चेन में रुकावटें और गहरी हुईं।

आरबीआई गवर्नर ​​ने कहा, “हमारे पास फ्लेक्सिबल महंगाई टारगेटिंग का यह फ्रेमवर्क है, लेकिन ऐसे समय में यह काफी नहीं है,” और कहा कि अगर सप्लाई शॉक इतना बड़ा है तो फिस्कल कोऑर्डिनेशन बहुत जरूरी हो जाता है।

समाचार एजेंसी PTI ने पहले सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया था कि जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

पहले ही सरकारी तेल कंपनियों ने बढ़ती इनपुट लागत के हिसाब से पहले ही कमर्शियल LPG, इंडस्ट्रियल डीजल, 5 केजी वाली एलपीजी सिलेंडर और इंटरनेशनल एयरलाइंस को बेचे जाने वाले जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ा दी हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और सोने पर खर्च कम करने की अपील की, ताकि भारत के घटते विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर दबाव कम किया जा सके। यहां पढ़ें पूरी खबर…