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कांग्रेस और वाम ने की पेट्रोल व डीजल के दामों को कम करने की मांग

संसद में मंगलवार को कांग्रेस और वाम सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की घटती कीमतों का उल्लेख करते हुए पेट्रोल व डीजल के दामों को कम करने की मांग की ताकि उपभोक्ताओं को लाभ मिल सके। राज्यसभा में माकपा के केएन बालगोपाल ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार […]

संसद में मंगलवार को कांग्रेस और वाम सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की घटती कीमतों का उल्लेख करते हुए पेट्रोल व डीजल के दामों को कम करने की मांग की ताकि उपभोक्ताओं को लाभ मिल सके। राज्यसभा में माकपा के केएन बालगोपाल ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मूल्य घटने के बावजूद उपभोक्ताओं को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि सरकार कहती है कि उसने पेट्रोल व डीजल के दाम नियंत्रण मुक्त कर दिए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने मूल्य घटाने के बजाए बढ़ा दिए हैं। उन्होंने मूल्यों को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त करने की मांग करते हुए कहा कि पेट्रोल के दाम 45 रुपए प्रति लीटर व डीजल के दाम 40 रुपए प्रति लीटर होने चाहिए। इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि क्या माकपा यह चाहती है कि मूल्यों को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त करने के साथ ही पेट्रोलियम क्षेत्र से पूरी सबसिडी भी वापस ले ली जाए। जेटली ने पूछा कि क्या माकपा सदस्य अपनी मांग का नतीजा जानते हैं। यदि पेट्रोलियम क्षेत्र को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त कर दिया जाएगा तो रसोई गैस और केरोसिन से सबसिडी भी खत्म हो जाएगी।

इस मुद्दे पर उपसभापति पीजे कुरियन ने वाम सदस्य से मुस्कुराते हुए पूछा-क्या आप अब दामों को नियंत्रण मुक्त करने का समर्थन कर रहे हैं। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि उनकी पार्टी का कहना है कि सरकार की जब दामों को नियंत्रण मुक्त करने की नीति है तो वह कच्चे तेल के मूल्यों के अनुरूप दामों को क्यों नहीं घटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बजाय सरकार अपना राजस्व बढ़ाने में लगी हुई है।

उधर लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह मामला उठाते हुए कहा कि पेट्रोलियम पदार्थो के अंतरराष्ट्रीय दाम लगातार घट रहे हैं लेकिन सरकार उसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दे रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया था। जिसे लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल के दाम कम से कम सवा तीन रुपए प्रति लीटर घटने चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है और सरकार थोड़े बहुत दाम घटाकर यह गलत प्रचार कर रही है कि नई सरकार के आने से ऐसा हो रहा है। जबकि वह पेट्रोलियम के अंतरराष्ट्रीय दामों में आई कमी के अनुरूप देश में उसकी कीमतें कम नहीं कर रही है।

इसी मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव का एक अन्य नोटिस देने वाले आरएसपी के एनके रामचंद्रन ने कहा कि सरकार ने 14 नवंबर और 14 दिसंबर को तेल के दामों से संंबंधित दो -दो अधिसूचनाएं जारी कीं। लेकिन उसने इनके बारे में संसद को जानकारी नहीं देकर उसकी उपेक्षा की है।

 

 

 

 

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