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सैलरी बढ़ोतरी के बाद क्‍या आपको भी देना होगा टैक्‍स? जानें- निवेश के साथ-साथ कैसे बचा स‍कते हैं पैसा

यहां कुछ निवेश के विकल्‍प आपके लिए बताए गए हैं, जिसमें आप निवेश कर अधिक टैक्‍स का पैसा बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कौन सी स्‍कीमों में निवेश करने पर टैक्‍स की बचत होगी।

Tax Saving Tips | Salary Hike
कई ऐसी सरकारी स्‍कीमें है, जिसमे निवेश करने पर आपको टैक्‍स में छूट मिलेगी (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सैलरी बढ़ोतरी होना एक खुशी से कम नहीं है, इससे महंगाई पर काबू पाने के लिए कुछ राहत मिलती है। साथ ही सेविंग का रास्‍ता भी नजर आता है, हालाकि अधिक सैलरी में बढ़ोतरी आपको टैक्‍स के दायरे में रख सकता है। ऐसे में अगर आप अपने महीने के सैलरी मे कर की कटौती या अधिक कर के भुगतान से बचना चाहते हैं तो आपको पहले टैक्‍स सेविंग साधनों में निवेश करना चाहिए।

यहां कुछ निवेश के विकल्‍प आपके लिए बताए गए हैं, जिसमें आप निवेश कर अधिक टैक्‍स का पैसा बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कौन सी स्‍कीमों में निवेश करने पर टैक्‍स सेविंग होती है।

NPS
अगर आपकी वेतन वृद्धि हुई है, तो आपको अपनी जोखिम सहनशीलता के आधार पर टैक्‍स बचाने के लिए आप राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) का विकल्प चुन सकते हैं। यह धारा 80 सी के तहत प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त कर कटौती प्रदान करता है। यह सरकार की ओर से चलाई जाने वाली बचत योजना है, जो इक्विटी, सरकारी प्रतिभूतियों, कॉर्पोरेट ऋण और वैकल्पिक निवेश कोष जैसी संपत्तियों की पेशकश करती है।

वहीं एनपीएस आईटी अधिनियम की धारा 80CCD(1B) के तहत प्रति वित्तीय वर्ष 50,000 रुपये तक की कर कटौती प्रदान करता है। इसके अलावा, यदि नियोक्ता कर्मचारी के नाम पर एनपीएस में योगदान देता है, तो कोई अपने वेतन (मूल वेतन + महंगाई भत्ता) के 10 प्रतिशत तक का दावा कर सकता है।

PPF
पीपीएफ भी धारा 80सी कर कटौती के तहत आती है, इसके तहत निवेशक पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) या नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में निवेश कर सकते हैं, जो बैंक FD की तुलना में अधिक ब्याज दर प्रदान करते हैं। इस योजना में आयकर की धारा 80 सी के तहत कर कटौती की जा सकती है।

NSC
राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) के मामले में, अर्जित ब्याज का भुगतान निवेशकों को नहीं किया जाता है बल्कि इसमें दोबारा से निवेश हो जाता है। निवेश के पहले चार वर्षों के दौरान एनएससी पर ब्याज धारा 80 सी टैक्‍स छूट दी जाती है। हालांकि, परिपक्वता पर पांचवें वर्ष में एनएससी ब्याज पर आपके आयकर दायरे के अनुसार कर लगता है। बता दें कि सरकार हर तिमाही में पीपीएफ और एनएससी जैसी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में संशोधन करती है। पीपीएफ वर्तमान में अप्रैल से जून 2022 तिमाही के लिए 7.1 प्रतिशत की ब्याज दर और एनएससी 6.8 प्रतिशत की ब्याज दर प्रदान करता है।

ईएलएसएस
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में भी निवेश किया जा सकता है, जो मुख्य रूप से इक्विटी और इक्विटी से जुड़े उपकरणों में निवेश करते हैं। इसमें तीन साल की लॉक-इन अवधि है और यह धारा 80C कर कटौती के लिए योग्य है। इसके अलावा, ईएलएसएस से 1 लाख रुपये तक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर-मुक्त हैं। 1 लाख रुपये से ऊपर के ईएलएसएस से एलटीसीजी पर 10 फीसदी टैक्स देना होगा।

पीएफ
वेतनभोगी कर्मचारी अनिवार्य कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योगदान के अलावा स्वैच्छिक भविष्य निधि (वीपीएफ) में निवेश करने का विकल्प चुन सकते हैं। यह एक सुरक्षित निवेश विकल्प है, और अंशदान धारा 80सी कर कटौती के योग्य है। VPF वर्तमान में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 8.1 प्रतिशत की ब्याज दर देता है। वर्तमान में ईपीएफ या वीपीएफ में 2.5 लाख रुपये से अधिक के योगदान पर प्राप्त ब्याज लागू टैक्स स्लैब दरों पर कर योग्य है। साथ ही 10 फीसद का टीडीएस भी काटा जाएगा।

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