1000 प्वॉइंट्स क्यों गिर गया Sensex और इस तरह की स्थिति में क्या करें निवेशक?

शेयर बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि, निकट भविष्य में बाजार में तेजी आएंगी। इसलिए निवेशकों को ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। क्योंकि घरेलू आर्थिक सुधार पटरी पर है और भारत में कोरोना टीकाकरण की गति भी अच्छी है।

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BSE दोपहर तक एक हजार पॉइंट नीचे गिरा। (फाइल फोटो)

संदीप सिंह. भारतीय शेयर बाजार BSE में सोमवार दोपहल तेज गिरावट देखने को मिली। BSE सेंसेक्स 1,170.12 अंक टूटकर 58,465.89 अंक पर बंद हुआ और निफ्टी 348.25 अंक के नुकसान से 17,416.55 अंक पर बंद हुआ। इसकी सबसे बड़ी वजह विभिन्न देशों में कोरोनावायरस के बढ़ते मामले हैं। इसके साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में जो 4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। वो RIL में सऊदी अरामनो द्वारा ली जाने वाली 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी को छोड़ने के फैसले के बाद देखने को मिली। इसके अलावा शेयर बाजार के गिरने की वजह सरकार के कृषि कानून को वापस लेना की घोषण करना भी माना जा रहा है। ऐसे में निवेशकों का मूड खराब दिख रहा है। जिसका सीधा असर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में गिरावट के साथ देखने को मिला।

बाजारों को क्या परेशान कर रहा है? इसी साल 19 अक्टूबर को BSE ने 62,245 के उच्च स्तर के बेंचमार्क को छूआ था। लेकिन पिछले एक महीने में 5.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ सेंसेक्स 3600 अंक टूट गया। वहीं जनवरी और अक्टूबर के बीच के 10 महीनों का आंकलन किया जाए। तो विश्व में कोविड के बढ़ते मामलों की वजह से कई देशों में लगाया गया लॉकडाउन इसकी एक वजह जरूर बना है।

इसके अलावा केंद्र सरकार के द्वारा सुधार के एजेंडे से एक कदम पीछे हटाना भी शेयर बाजार में गिरावट की एक वजह बताया जा रहा है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को आगामी शीतकालीन सत्र में तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की है। जिसके बाद से ही निवेशकों का मूड खराब है। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज और सऊदी अरामको के बीच रद्द हुई डील भी शेयर बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हुई है।

आगे बाजार का कैसा रहेगा रूख? फिलहाल शेयर बाजार में तुरंत राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। लेकिन लंबी अवधि में बाजार में फिर से तेजी आएगी। ऐसे में आने वाले दिन काफी दबाव में होंगे। इसके अलावा यूरोप सहित दूसरे देशों में कोविड के बढ़ते मामले और वैश्विक आर्थिक सुधार की गति भी बाजार के रूख को दिशा देगी। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा परिसंपत्ति खरीद में कमी भी शेयर बाजार पर दबाव बनाएंगी।

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निवेशकों को क्या करना चाहिए? शेयर बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि, निकट भविष्य में बाजार में तेजी आएंगी। इसलिए निवेशकों को ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। क्योंकि घरेलू आर्थिक सुधार पटरी पर है और भारत में कोरोना टीकाकरण की गति भी अच्छी है। ऐसे में एक बार फिर शेयर बाजार नई ऊंचाई पर पहुंचेगा।

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