Hero Cycles के सर्वेसर्वा के पास जब उधार लेने गए थे Airtel के सुनील मित्तल, दिल को छू गई थी मुंजाल बाबू की कही यह बात

16 से 18 घंटे तक कड़ी मेहनत करते और सामान्य होटलो में ठहरते। ऊपर से जो पैसे मिलते, वे भी नाकाफी होते। 1980 में वह दूसरे काम धंधों में नई संभावनाएं तलाशने लगे और मुंबई का रुख कर गए।

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नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान Bharti Enterprises के चेयरमैन और ग्रुप सीईओ सुनील भारती मित्तल। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारतीय टेलीकॉम कंपनी एयरटेल (Bharti Airtel Limited) आज देश की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी है। टेलीकॉम रेग्युलेट्री अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2021 में कंपनी के ग्राहकों की संख्या बढ़कर 35.44 करोड़ हो गई, जो कि अगस्त में 35.41 करोड़ थी। कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में न सिर्फ सेवाएं और बढ़िया स्ट्रैटेजी जिम्मेदार रही, बल्कि इसके संस्थापक और चेयरमैन का विजन भी है।

मित्तल की कहानी भी संघर्षों के दौर से भरी है। उन्होंने शुरुआती दिनों को याद करते हुए रोचक किस्सा सुनाया था, जो कि कर्ज लेने से जुड़ा था। वह तब हीरो साइकिल्स के संस्थापक बृजमोहन लाल मुंजाल के पास गए थे और उनसे पांच हजार रुपए का चेक लिखने के लिए कहा था। चेक तो आराम से मिल गया, पर जाते-जाते मुंजाल बाबू ने उनसे बड़ी गहरी बात कह दी। वह समझाने वाले अंदाज में प्यार से बोले कि बेटा, इसे आदत मत बना लेना। मुंजाल बाबू की यह बात मानों मित्तल के दिलो-दिमाग में उतर गई और वह इसे ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ते गए।

पंजाब में लुधियाना शहर के राजनेता सतपाल मित्तल के पुत्र सुनील 18 बरस की उम्र में बिजनेस में कूद गए थे। यह बात उनके पंजाब विवि से इकनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में ग्रैजुएशन करने से तीन साल पहले यानी कि साल 1976 की है।

मित्तल ने साइकिल पार्ट्स बनाने से जुड़ी यूनिट लगाने के लिए पिता से 20 हजार रुपए मांगे थे। तीन साल के भीतर उन्होंने इनकी संख्या बढ़ाकर कुल तीन कर ली। चूंकि, उस दौर में वह हवाई जहाज से यात्रा करने उनके लिए मुनासिब नहीं था इसलिए वह अपने सामान के साथ ट्रक या फिर रेल से सफर करते थे। 16 से 18 घंटे तक कड़ी मेहनत करते और सामान्य होटलो में ठहरते। ऊपर से जो पैसे मिलते, वे भी नाकाफी होते। 1980 में वह दूसरे काम धंधों में नई संभावनाएं तलाशने लगे और मुंबई का रुख कर गए।

साइकिल का धंधा बेच कर वह आगे बढ़े। फिर वह इलेक्ट्रिक पावर वाले जेनरेटर के काम में आए। कुछ वक्त तक इसमें प्रॉफिट भी कमाया, मगर सरकार ने 1983 में जेनरेटर के निर्यात पर रोक लगा दी, तो उनके धंधे को तगड़ा झटका लग गया। आगे पुश बटन वाला फोन लेकर आए। उन्होंने इसे ताइवान से इंपोर्ट करने का निर्णय लिया, जो कि भारत में बीटल नाम से बिकता था।

1995 में उन्होंने सेल्युलर सेवाओं की पेशकश के लिए भारतीय सेल्युलर लिमिटेड की स्थापना की और एयरटेल के बैनल तले काम शुरू कर दिया। 2008 आते-आते कंपनी के देश में छह लाख यूजर्स हो चुके थे। यह वह दौर था, जब कंपनी दुनिया की शीर्ष टेलीकॉम कंपनी थी। हालांकि, मुकेश अंबानी की रिलायंस के जियो लाने के बाद यह सफलता के ट्रैक से थोड़ा लड़खड़ा गई। एयरटेल को बाजार के मद्देनजर अपनी दरों को कम करना पड़ा।

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