प्रोविडेंट फंड के नए नियमों का आपकी जेब पर क्‍या होगा असर, जानिए यहां सबकुछ

सरकार ने प्रोविडेंट फंड कंट्रीब्‍यूशन पर एक लिमिट से ज्‍यादा अर्जित ब्याज पर टैक्‍स लगाने के नियमों को नोटिफाई किया है। इसकी क्‍या लिमिट है, कितना टैक्‍स लगेगा और इसका क्‍या उद्देश्‍य है?

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ईपीएफ में 2.5 लाख रुपए से लेकर 5 लाख रुपए से ज्‍यादा योगदान पर होने आय पर ब्‍याज वसूला जाएगा। (Indian Express Archive)

फरवरी में अपने बजट घोषणा के बाद, वित्त मंत्रालय ने अब कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में 2.5 लाख रुपए (निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए) और 5 लाख रुपये (सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए) से अधिक के योगदान पर ब्याज आय पर टैक्‍स कर लगाने के नियमों को नोटिफाई किया है। इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत में, सरकार इन सीमाओं से अधिक के योगदान पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्‍स लगाएगी, जिसमें अलग-अलग खातों को प्रोविडेंट फंड अकाउंट में 2021-22 और बाद के वर्षों के लिए टैक्‍सेबल कंट्रीब्‍यूशन और किसी व्यक्ति द्वारा किए गए नॉन टैक्‍सेबल कंट्रीब्‍यूशन के लिए बनाए रखा जाएगा।

ईपीएफ योगदान पर टैक्‍स क्या है?
फरवरी में, बजट में प्रस्ताव किया गया था कि एक वर्ष में 2.5 लाख रुपए से अधिक के पीएफ योगदान पर ब्याज आय पर टैक्‍स छूट उपलब्ध नहीं होगी। हालांकि यह ईपीएफ में योगदान करने वाले सैलरीड लोगों के लिए एक चिंता का विषय है, यह केवल उन लोगों को प्रभावित करेगा जो एक वर्ष में 2.5 लाख रुपए से अधिक का योगदान करते हैं और यह उनके मौजूदा कॉर्पस या उस पर कुल वार्षिक ब्याज को प्रभावित नहीं करेगा। मार्च में, सरकार ने वित्त विधेयक, 2021 में एक संशोधन पेश किया, जिसमें उसने कर-मुक्त ब्याज आय के लिए योगदान पर सीमा को 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव दिया, यदि योगदान किसी ऐसे फंड में किया जाता है, जहां इंप्‍पॉलयर का कोई योगदान नहीं। इसके साथ, सरकार ने जनरल प्रोविडेंट फंड में किए गए योगदान के लिए राहत प्रदान की जो केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है और इंप्‍लॉयर का कोई योगदान नहीं है।

इस टैक्‍सेशन को लेकर क्या नियम हैं?
नियमों को 31 अगस्त को वित्त मंत्रालय द्वारा नोटिफाई गया था। 1 अप्रैल, 2022 से लागू होने वाले आयकर नियम, 1962 में एक संशोधन में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नियम 9डी डाला है, जिसके अनुसार पिछले वर्ष के दौरान अर्जित ब्याज के माध्यम से कौन सी आय जि‍समें छूट नहीं है की गणना टैक्‍सेबल कंट्रीब्‍यूशन अकाउंट में पिछले वर्ष के दौरान मिलने वाले ब्याज से की जाएगी। हालांकि, ईपीएफओ ने अपने अकाउंट में टैक्‍सेबल और नॉन टैक्‍सेबल कंट्रीब्‍यूशन को अलग करने को औपचारिक रूप दिया है। कुछ ईपीएफ बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि ऐसे कंट्रीब्‍यूटर्स के लिए अकाउंट अलग करने में समय लगेगा। डाटा कलेक्‍ट करना होगा और फिर ऐसे अकाउंट्स के लिए अकाउंट‍िंग प्रोसेस निर्धारित करना होगा। सीबीडीटी ने कहा है कि 31 मार्च, 2021 को क्लोजिंग बैलेंस और उस पर मिलने वाले ब्याज को नॉन टैक्‍सबल कंपोनेंट माना जाएगा। टैक्‍सबल कंट्रीब्‍यूशन अकाउंट में पिछले वर्ष (2021-22) के दौरान खाते में व्यक्ति द्वारा किए गए योगदान और बाद के वर्षों में सीमा सीमा से अधिक योगदान शामिल होगा।

क्यों लाया यह प्रस्‍ताव?
बजट प्रस्ताव में कहा गया था कि सरकार को ऐसे उदाहरण मिले हैं जहां कुछ कर्मचारी इन फंडों में भारी मात्रा में योगदान दे रहे हैं और सभी फेज यानी योगदान, ब्याज लेने और रुपया निकालने में टैक्‍स बेनिफ‍िट ले रहे हैं। हाई नेटवर्थ वाले व्यक्तियों (HNI) को उनके बड़े योगदान पर इन बेनि‍फ‍िट्स से बाहर करने के लिए सरकार ने टैक्‍स छूट के लिए सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव किया है। यह 1 अप्रैल, 2021 से शुरू होने वाले सभी योगदानों पर लागू होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में बजट पेश करते हुए कहा था, “यह फंड वास्तव में श्रमिकों के लाभ के लिए है, और श्रमिक इससे प्रभावित नहीं होने वाले हैं।” यह केवल उन लोगों के लिए जो इसमें टैक्‍स बेनिफ‍िट के लिए निवेश करते हैं, साथ ही करीब 8 फीसदी का रिटर्न हासिल करते हैं। इसमें कुछ लोग तो एक करोड़ रुपए तक डाल देते हैं। हर महीने इस फंड में 1 करोड़ रुपये डालने वाले की सैलरी कितनी होनी चाहिए? जिसकी वजह से इस नियम लाने की जरुरत थी।

इस पर टैक्स कैसे लगेगा?
अगर कोई व्यक्ति भविष्य निधि (स्वैच्छिक पीएफ योगदान सहित) में हर साल 3 लाख रुपए का योगदान देता है तो उसके 2.5 लाख रुपए से अधिक के योगदान पर ब्याज यानी 50,000 रुपए पर टैक्‍स लगेगा। आंकड़ों पर बात करें तो 50 हजार रुपए पर 8.50 फीसदी के हिसाब से ब्‍याज 4,250 रुपए होगा जिस पर मार्जिनन रेट पर टैक्‍स लगाया जाएगा। अगर व्यक्ति 30 फीसदी टैक्स ब्रैकेट में आता है, तो उसे 1,325 रुपए का टैक्स देना होगा। एक वर्ष में 12 लाख रुपए का योगदान करने वाले व्यक्ति के लिए, 9.5 लाख रुपए (12 लाख रुपए घटा 2.5 लाख रुपये) पर ब्याज आय पर कर लागू होगा। इस मामले में कर देनदारी 25,200 रुपए होगी।

क्या इस पर हमेशा के लिए टैक्‍स लगेगा?
नोटिफ‍िकेशन के अनुसार एक वर्ष के लिए अतिरिक्त योगदान (निजी के लिए 2.5 लाख रुपए से अधिक और सरकारी कर्मचारियों के लिए 5 लाख रुपए) पर ब्याज आय पर हर साल टैक्‍स लगेगा। इसका मतलब यह है कि अगर वित्त वर्ष 22 में पीएफ में आपका सालाना योगदान 10 लाख रुपए है, तो 7.5 लाख रुपए की इंट्रस्‍ट इनकम पर न केवल वित्त वर्ष 22 के लिए बल्कि बाद के सभी वर्षों के लिए भी कर लगेगा। अगर वित्त वर्ष 2023 के लिए पीएफ योगदान समान है, तो 15 लाख रुपए के इंट्रस्‍ट से होने वाली इनकम पर टैक्‍स का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा, यदि आपने पिछले वर्ष 8.5 फीसदी का ब्याज अर्जित किया है, और यदि आप उच्चतम टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो अगले वर्ष आप अतिरिक्त योगदान पर लगभग 5.85 फीसदी अर्जित करेंगे (यह मानते हुए कि ब्याज दर कमें बदलाव नहीं हुआ है)।

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