किसे कहते हैं आईपीओ, कैसे होता है निवेश, किन बातों का रखें का ध्‍यान, जानि‍ए यहां

आईपीओ से पहले, एक कंपनी सीमित शेयरधारकों के साथ निजी तौर पर कारोबार करती है। हालांकि, IPO के बाद, शेयरों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि आप और मेरे जैसे लोग और अन्य इंस्‍टीट्यूशनल इंवेस्‍टर्स कंपनी के शेयर खरीदते हैं। इस प्रारंभिक पेशकश के साथ, कंपनी स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्‍टेड हो जाती है, जिससे शेयरों की खरीद और बिक्री में सुविधा होती है।

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कोविड -19 महामारी के प्रभाव के बावजूद, ऐसा लगता है कि देश में इस साल रिकॉर्ड संख्या में आईपीओ आएंगे। (Photo By Financial Express Archive)

इस मानसून भारत में आईपीओ की बारिश हो रही है। पिछले सात महीनों में 40 आईपीओ पहले ही आ चुके हैं। वहीं कई आईपीओ कतार में लगे हुए हैं। जबकि पूरे 2020 में 33 और 2019 में 49 आईपीओ आए थे। कोविड -19 महामारी के प्रभाव के बावजूद, ऐसा लगता है कि देश में इस साल रिकॉर्ड संख्या में आईपीओ आएंगे। जिससे निवेशकों को भी कमाई करने का भरपूर मौका मिलेगा। पहले यह समझना काफी जरूरी है कि आख‍िर आईपीओ है क्‍या और यह काम कैसे करता है। साथ ही निवेशकों को आईपीओ में निवेश करने से पहले किन बातों का ध्‍यान रखना काफी जरूरी है।

आईपीओ क्या है?
आईपीओ यानी इनिशि‍यल पब्‍लि‍क ऑफरिंग का मतलब है कि कि किसी कंपनी के शेयरों को पहली बार जनता के सामने बिक्री के लिए जनता के सामने लाना। आईपीओ से पहले, एक कंपनी सीमित शेयरधारकों के साथ निजी तौर पर कारोबार करती है। हालांकि, IPO के बाद, शेयरों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि आप और मेरे जैसे लोग और अन्य इंस्‍टीट्यूशनल इंवेस्‍टर्स कंपनी के शेयर खरीदते हैं। इस प्रारंभिक पेशकश के साथ, कंपनी स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्‍टेड हो जाती है, जिससे शेयरों की खरीद और बिक्री में सुविधा होती है। आईपीओ कंपनी के मालिकों और शुरुआती निवेशकों को बिक्री के प्रस्ताव के माध्यम से बाहर निकलने का ऑप्‍शन भी देती है। उन्हें नए व्यवसाय में शुरुआती जोखिम लेने के लिए कंपनसेट करती है।

कैसे किया जाता है आईपीओ के लिए आवेदन
खुदरा निवेशक यानी रिटेल इंवेस्‍टर के रूप में, आप आईपीओ के लिए या तो अपने बैंक के माध्यम से या ब्रोकर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जो आपके लिए आईपीओ आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाएगा। आवेदन राशि एकत्र करने के लिए, बैंकों के पास ब्‍लॉक्‍ड अमाउंट सुविधा द्वारा सपोर्टिड एक आवेदन है। कुछ ब्रोकर यूपीआई के माध्यम से आईपीओ इंवेस्‍टमेंट की सुविधा प्रदान करते हैं। दोनों ही मामलों में, आवेदन राशि को तब तक ब्‍लॉक करके रखा जाता है जब तक कि शेयर आवंटन को अंतिम रूप नहीं दिया जाता है और अगर आवेदन खारिज हो जाता है तो बैंक की ओर से उस राश‍ि को वापस कर दिया जाता है। आवेदन के समय, पेश किए गए शेयरों को या तो कम या अधिक सब्सक्राइब किया जा सकता है। जब ओवरसब्सक्राइब किया जाता है, तो शेयरों के आवंटन की गारंटी नहीं होती है, और आवंटन नहीं होने की स्थिति में, आवेदन राशि वापस कर दी जाती है या ब्‍लॉक्‍ड अमाउंट जारी कर दिया जाता है।

आईपीओ इंवेस्‍टमेंट में क्‍या जोख‍िम है?
मुख्य रूप से व्यापार और अत्यधिक शेयर बाजार गतिविधि पर COVID-19 महामारी के प्रभाव के कारण कई कंपनियों ने 2020 के अंत से आईपीओ का ऑप्‍शन चुना। विश्लेषकों के अनुसार शेयर बाजारों में देखे गए असामान्य प्रदर्शन और हाई नेटवर्थ वाले लोगों के साथ पहली बार निवेशकों की ज्‍यादा भागीदारी की वजह से कंपनियां सार्वजनिक हो रही हैं। सोशल मीडिया प्रचार आपको लिस्टिंग लाभ की ओर आकर्षित कर सकता है। निवेशकों को लिस्टिंग के दिन शेयरों को बेचकर त्वरित लाभ की उम्मीद है क्योंकि शेयरों को इश्‍यू प्राइस की तुलना में बहुत अधिक कीमत पर लिस्टिड हो जाती है। लगभग 60 प्रतिशत निवेशक लिस्टिंग प्रोफ‍िट के लिए आईपीओ में भाग लेते हैं, और केवल कुछ ही अवधि के लिए रुकते हैं।

यह देखा गया है कि पिछले दशक में अधिकांश आईपीओ (लगभग 70 प्रतिशत) ने या तो लिस्टिंग लाभ या वर्तमान लाभ, या दोनों नहीं दिए। इससे पता चलता है कि निवेशकों को अवसरवादी अल्पकालिक निवेश को त्यागकर ओवर हाइप प्रोफिट से निकलकर आगे की ओर बढ़ना चाहिए। आईपीओ में निवेश करने का निर्णय लेने से पहले आपको कंपनी का करना भी काफी जरूरी है।

आपको आईपीओ का विश्लेषण कैसे करना चाहिए?
एक लिस्‍ट‍ेड कंपनी के हिस्‍टोरिकल डाटा के साथ विश्लेषण करना काफी चुनौतीपूर्ण है, और जब एक निजी कंपनी के सार्वजनिक होने की बात आती है तो यह और भी अधिक समस्या वाली बात हो जाती है। ऐसी कंपनियों के बारे में डाटा का एकमात्र सोर्स उनका रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) है। यह वो डॉक्‍युमेंट होता है जिससे पता चलता है कंपनी कि‍स तरह के अवसर हैं और किस तरह के जोख‍िम हो सकते हैं। इस डॉक्‍युमेंट में प्रमोटर्स के नाम, वे कितनी राशि जुटाना चाहते हैं, ताजा इश्यू का विवरण और बिक्री की पेशकश सभी जानकारी होती है।

एक निवेशक के रूप में, आपको ऑफ़र के उद्देश्यों को देखना चाहिए, यह धन के उपयोग को बताता है। ये ऑर्गैनिक ग्रोथ के लिए हो सकते हैं, जो आम तौर पर एक अच्छी बात है, या ऋण को कम करने के लिए, या एक सिंपल एग्जिट अपॉर्च्‍यूनिटीज के लिए हो सकता है। फिर, कंपनी के व्यवसाय मॉडल और बैकग्राउंड, इंडस्‍ट्री पैरामीटर (बाजार का आकार, संभावित विकास, नियामक जोखिम), और पिछले तीन वर्षों के लिए उपलब्ध फाइनेंस का मूल्यांकन करें। इसके अतिरिक्त, आप कंपनी के मुकदमों, कैपिटल स्‍ट्रक्‍चर और वैल्‍यूएशन को भी देख सकते हैं।

कुल मिलाकर, आपको अपने निवेश के उद्देश्यों और वित्तीय लक्ष्यों को देखते हुए सावधानीपूर्वक आंकलन करना चाहिए कि कंपनी की प्रोफाइल आपके पोर्टफोलियो में फिट बैठती है या नहीं। निवेश करने से पहले हमेशा अपना रिसर्च करें और सोशल मीडिया के झांसे में न आएं।

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