खाने का सामान सस्ता होने से पांच महीने के निचले स्‍तर पर खुदरा महंगाई

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर इस साल सितंबर में नरमी देखने को मिली है। यह अब 0.68 फीसदी पर आ गई हैं, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 3.11 फीसदी पर था।

Retail Inflation Rate
खुदरा महंगाई दर 4.35 फीसदी के साथ पांच महीने के निचले स्‍तर पर आ गई है। (Express Photo by Prashant Nadkar)

सब्जी और दूसरी खाने-पीने के सामान की कीमत में कमी आने की वजह से सितंबर महीने में खुदरा महंगाई घटकर पांच महीने के निचले स्‍तर 4.35 फीसदी पर आ गई। मंगलवार को आए आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीाई) आधारित मुद्रास्फीति में नरमी भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास के आकलन के अनुरूप है। उन्होंने पिछले सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए खुदरा महंगाई दर में कमी का अनुमान जताया था। आपको बता दें क‍ि अगस्‍त के महीने में महंगाई दर 5.3 फीसदी और 2020 के सितंबर महीने में 7.27 फीसदी प्रतिशत थी। वहीं अप्रैल 2021 में यह दर 4.23 फीसदी थी।

खाने-पीने का सामान हुआ सस्‍ता
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर इस साल सितंबर में नरमी देखने को मिली है। यह अब 0.68 फीसदी पर आ गई हैं, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 3.11 फीसदी पर था। सब्जी की महंगाई दर में सितंबर में 22.47 फीसदी की कमी आई जबकि अगस्त में इसमें 11.68 फीसदी गिरावट देखने को मिली थी। फल, अंडा, मांस और मछली तथा दाल एवं उत्पादों के मामले में कीमत वृद्धि की दर नरम रही। हालांकि, फ्यूल और बिजली के मामले में महंगाई बढ़कर 13.63 फीसदी हो गई है जो जो अगस्त में 12.95 फीसदी थी।

क्‍या कहते हैं जानकार
इक्रा की चीफ इकोनॉमिस्‍ट अदिति नायर ने कहा कि अगस्त में 5.3 फीसदी के मुकाबले सितंबर, 2021 में खुदरा महंगाई दर के कम होकर 4.35 फीसदी पर आना उल्लेखनीय है और यह इक्रा के अनुमान से ज्यादा है। मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं के दाम कम होने से महंगाई दर कम हुई है। इसके अलावा आवास क्षेत्र का भी कुछ योगदान है। उन्होंने कहा कि उच्च तुलनात्मक आधार से अक्टूबर-नवंबर 2021 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति कम होकर 4 फीसदी से नीचे जा सकती है। उसके बाद इसमें तेजी आने का अनुमान है। आईडीएफसी एएमसी में कोष प्रबंधक और अर्थशास्त्री श्रीजीत बालासुब्रमण्यम ने कहा कि मुद्रास्फीति में गिरावट का प्रमुख कारण खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में नरमी है। हालांकि मुख्य मुद्रास्फीति 5.8 फीसदी पर बनी हुई है।

महंगाई दर पर आरबीआई का मत
भारतीय रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पर विचार करते समय मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर पर गौर करता है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को 2 फीसदी घट-बढ़ के साथ खुदरा मुद्रास्फीति को 4 फीसदी पर बरकरार रखने की जिम्मेदारी दी हुई है। रिजर्व बैंक के गवर्नर दास ने पिछले सप्ताह मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद कहा था कि कुल मिलाकर सीपीआई मुद्रास्फीति में नरमी दिख रही है।

आरबीआई ने लगाया महंगाई का अनुमान
आने वाले महीनों में अनुकूल तुलनात्मक आधार को देखते हुए यह उल्लेखनीय रूप से कम होगी। आरबीआई ने 2021-22 के लिए सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति 5.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में संतुलित जोखिम के साथ इसके 5.1 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.8 फीसदी रहने का अनुमान रखा गया है।

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