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PPF Vs NPS: रिटायरमेंट फंड के लिए दोनों सरकारी स्कीम में कौन सी है बेहतर, जानिए सबकुछ

लंबी अवधि के निवेश के लिए NPS स्कीम बेहतर है और शॉर्ट टर्म के निवेश के लिए PPF बेहतर विकल्प है। अगर आप फिक्स्ड रिटर्न चाहते है तो PPF में पैसा जमा कर सकते है। जबकि NPS में आपका रिटर्न शेयर मार्केट के ऊपर निर्भर करता है।

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PPF अकाउंट में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.50 लाख रुपये सालाना जमा किए जा सकते हैं।

PPF Vs NPS: नौकरी करते समय सभी को अपने रिटायमेंट के बाद के खर्चों की चिंता होती है ये होना भी जरूरी है। क्योंकि रिटायरमेंट के बाद आमदनी का कोई जरिया नहीं होता और अपकी सेविंग ही रोजमर्रा के खर्चो को चलाने में काम आती हैं। केंद्र सरकार ने लोगों की इसी जरूरत को ध्यान में रखकर रिटायरमेंट के लिए निवेश की दो स्कीम शुरू की है। जो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) है। कई बार लोगों को इन स्कीम की पूरी डिटेल मालूम नहीं होती जिसके चलते दोनों स्कीम में से अपने लिए बेहतर विकल्प का चुनाव नहीं कर पाते। इसलिए यहां हम आपको PPF और NPS स्कीम की पूरी जानकारी शेयर कर रहे हैं।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड – PPF अकाउंट में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.50 लाख रुपये सालाना जमा किए जा सकते हैं। इसमें निवेश की गई रकम पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तरह टैक्स में डिडक्शन मिलता है। वहीं PPF अकाउंट में मैच्योरिटी पीरियड 15 साल का होता है जिसे 5 साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही पैसों की जरूरत पड़ने पर 7 साल के बाद PPF अकाउंट को प्री-मैच्योर विथड्राल कराया जा सकता है। पीपीएफ अकाउंट में किए गए निवेश पर 7.1 प्रतिशत की ब्याज मिलती है। ऐसे में ये रिटायमेंट के लिए फंड जोड़ने का बेहतर विकल्प हो सकता है।

नेशनल पेंशन सिस्टम – NPS को रिटायरमेंट के बाद आमदनी के एक जरिएया के तौर पर डिजाइन किया गया है। इस स्कीम में 18-70 साल तक उम्र का कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है। NPS में जमा रकम को निवेश करने का जिम्मा PFRDA की ओर से रजिस्टर्ड पेंशन फंड मैनेजर्स को दिया जाता है। ये आपके निवेश को इक्विटी, गवर्नमेंट सिक्युरिटीज और नॉन गवर्नमेंट सिक्युरिटीज के अलावा फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं।

NPS के तहत इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD(1B) के तहत 50 हजार रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। अगर आप सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की लिमिट पूरी कर चुके हैं, तो एनपीएस आपको एक्स्ट्रा टैक्स सेविंग्स में भी मदद कर सकता है। इस योजना की मैच्योरिटी पर 60 फीसदी तक रकम निकालने पर टैक्स नहीं लगता है।

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NPS, PPF में बेसिक अंतर – लंबी अवधि के निवेश के लिए NPS स्कीम बेहतर है और शॉर्ट टर्म के निवेश के लिए PPF बेहतर विकल्प है। अगर आप फिक्स्ड रिटर्न चाहते है तो PPF में पैसा जमा कर सकते है। जबकि NPS में आपका रिटर्न शेयर मार्केट के ऊपर निर्भर करता है।

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