IPO में निवेश का बना लिया है प्लान, तो इन बातों का जरूर रख लें ख्याल, वरना हो सकता है नुकसान!

किसी भी नई कंपनी के IPO में निवेश करने से पहले उसके प्रोडक्ट और उसकी मार्केट में हिस्सेदारी की जानकारी होना काफी जरूरी है। क्योंकि कई बार छोटी कंपनी भी जोर-शोर से IPO लेकर आती हैं और बाद में लोगों को इसी वजह से काफी नुकसान होता है।

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आईपीओ में निवेश करने के लिए कुछ बुनियादी चीजों को जरूर जानना चाहिए। (सांकेतिक फोटो)

आदिल शेट्टी. भारतीय शेयर बाजार में इस समय नए आईपीओ की बहार आई हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि, स्टॉक मार्केट अभी तक के इतिहास में सबसे शीर्ष पर है। जिसके चलते नई कंपनियां शेयर बाजार में रजिस्टर हो रही है और अपना आईपीओ लॉन्च कर रही हैं। बीतें 2 साल में कई आईपीओ लॉन्च हुए हैं। जिसमें कई ने काफी अच्छा मुनाफा कमाया है तो कई आईपीओ बुरी तरह से पिट गए हैं। ऐसे में अगर आप भी किसी नए आईपीओ में निवेश करने की सोच रहे हैं। तो इससे पहले आपको आईपीओ और इसमें निवेश करने के तरीके के बारे में कुछ जरूरी चीजों को जान लेना चाहिए। जिससे आपके नुकसान की संभावना कम होगी। आइए जानते हैं इसके बारे में…

क्या होता है IPO ? आसान भाषा में समझें तो किसी प्राईवेट कंपनी को पब्लिक कंपनी में बदलने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए IPO लाया जाता है। इसमें कोई भी प्राईवेट कंपनी SEBI से मंजूरी मिलने के बाद शेयर बाजार में लिस्टेंड होती है और इसके बाद अपने शेयर लोगों के लिए बाजार में पेश करती है। इस दौरान कंपनी अपने एक शेयर की न्यूनतम कीमत भी तय करती है। जिस पर आम लोग अपनी जरूरत के अनुसार शेयर खरीदते हैं। आपको बता दें IPO लाने का असली मकसद प्राईवेट कंपनियों का अपनी भविष्य की योजनाओं को पूरा करने के लिए पूंजी जुटाने का होता है। जिसमें आप शेयर खरीद कर कंपनी में भागीदार बन सकते है। जिसके बाद अगर कंपनी को मुनाफा होता है तो आपके शेयर की कीमत भी बढ़ती है और आपको भी मुनाफा होता है।

DRHP को गहराई से पढ़ें – डीआरएचपी किसी भी नए आईपीओ की जन्मकुंडली होती है। इसे आईपीओ के लॉन्च से पहले सिक्योरीटीज मार्केट रेगुलेटर यानी सिक्योरीटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) में जमा कराया जाता है। जिसमें कंपनी से जुड़ी विस्तृत जानकारी शामिल की जाती है। डीआरएचपी में कंपनी का कारोबार, पिछला परफॉर्मेंस, सम्पत्ति और देयताएं, आईपीओ के ज़रिए प्राप्त फंड्स की क्यों जरूरत है और वह इस फंड का क्या करेगी, और संभावित जोखिम फैक्टर्स, जो कंपनी के परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकते हैं। उसकी पूरी जानकारी होती है। अगर आप डीआरएचपी को पूरा पढ़ते है तो आपके नुकसान की संभावना बहुत कम हो जाती है।

IPO से मिली पूंजी का उद्देश्य – कंपनी को पूंजी की आवश्यकता के बारे में ‘क्यों चाहिए’ फेक्टर को बहुत अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। यदि कंपनी कर्ज में डूबी है और डीआरएचपी में यह उल्लेख किया जाता है कि प्राप्त फंड्स का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए किया जाएगा, तो निवेशकों को इस प्रकार के इश्यू के प्रति सावधान हो जाना चाहिए। लेकिन, यदि उपयोग कर्ज के भुगतान और साथ ही विस्तार, दोनों उद्देश्यों से किया जाएगा, तो आप निवेश करने पर विचार कर सकते हैं।

प्रोमोटर्स और मैनेजमेंट को जानना जरूरी – जब भी आप नए IPO में निवेश करें तो सबसे पहले ये कंपनी किसके जरिए चलाई जा रही है। इसकी जानकारी हासिल करनी चाहिए। इसके साथ ही कंपनी के टॉप मैनंजमेंट में कौन किस पद पर है। इसकी भी जानकारी निवेश से पहले आपको होनी चाहिए। क्योंकि किसी भी कंपनी का भविष्य उसके मालिक और टॉप मैनेंजमेंट की योग्यता पर ही निर्भर करता है।

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कंपनी की स्थिति का जानान जरूरी – किसी भी नई कंपनी के IPO में निवेश करने से पहले उसके प्रोडक्ट और उसकी मार्केट में हिस्सेदारी की जानकारी होना काफी जरूरी है। क्योंकि कई बार छोटी कंपनी भी जोर-शोर से IPO लेकर आती हैं और बाद में लोगों को इसी वजह से काफी नुकसान होता है।

IPO में जोखिम के फैक्टर्स – कंपनी द्वारा अपने डीआरएचपी में बताए गए जोखिम फैक्टर्स पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ये फिल्टर्स की तरह काम करते हैं और जब बात आईपीओ में निवेश करने की आती है, तो इन्हीं के आधार पर तय किया जाता है कि क्या आईपीओ में निवेश किया जाए अथवा नहीं।

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