हर गिफ्ट को नहीं मिलती है टैक्‍स से छूट, जानिए किस तरह के उपहारों पर लगता है टैक्‍स

वैसे सभी मॉनेटरी गिफ्ट्स को टैक्‍स के दायरे में रखा जाता है। अधिनियम गैर-मौद्रिक उपहारों के मामले में केवल भूमि, भवन, शेयरों और प्रतिभूतियों, आभूषण, पुरातात्विक संग्रह, चित्र, पेंटिंग, मूर्तियां, कला और बुलियन के किसी भी काम के मामले में इसके दायरे को सीमित करता है।

gift tax
Gift Tax तब लगाया जाता है जब उसकी राश‍ि 50000 हजार रुपए से ज्‍याादा हो जाती है। (Photo By Financial Express)

भारत में उपहार कर गिफ्ट टैक्‍स को समाप्त करने के साथ, कुछ उपहार लेनदेन पर टैक्‍स लगाने के लिए वित्त अधिनियम, 2004 के तहत आयकर प्रावधान पेश किए गए थे। प्रारंभ में, उपहारों के टैक्‍सेशन के लिए आयकर प्रावधान व्यक्तियों और एचयूएफ द्वारा प्राप्त उपहारों तक ही सीमित थे। हालांकि, अब इस फंदे को और सख्‍त करते हुए उपहारों के टैक्‍सेशन के प्रावधानों को वित्त अधिनियम 2017 के माध्यम से संशोधित किया गया था और किसी भी व्यक्ति (कंपनी, फर्म, एओपी/बीओआई सहित) द्वारा प्राप्त किसी भी राशि और/या कुछ चल और अचल संपत्ति पर लागू किया गया था।

उपहारों पर कर
जबकि सभी मौद्रिक उपहारों को कवर किया जाता है, अधिनियम गैर-मौद्रिक उपहारों के मामले में केवल भूमि, भवन, शेयरों और सिक्‍योरिटीज, आभूषण, आर्कियोलॉजिकल कलेक्‍शन, ड्रॉइंग्‍स, पेंटिंग, मूर्तियां, कला और बुलियन के किसी भी काम के मामले में इसके दायरे को सीमित करता है।

एक वित्तीय वर्ष के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा कुल मिलाकर 50,000 रुपए से अधिक की कोई भी राशि प्राप्तकर्ता के हाथों कर योग्य होती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि छूट की सीमा की जांच उन सभी सोर्स को मिलाकर की जानी है, जहां से ऐसे व्यक्ति को पैसा मिलता है। उदाहरण के लिए, व्यक्ति A को B से 21,000 रुपए, C से 31,000 रुपए और D से 5,100 रुपए मिलते हैं।

चूंकि कुल मिलाकर ए को 57,100 रुपए प्राप्त हुए हैं जो कि 50,000 रुपये की सीमा से ऊपर है, उपहार के रूप में प्राप्त ऐसी कुल राशि पर ए के हाथों टैक्‍स लगाया जाएगा, भले ही व्यक्तिगत रूप से कोई भी राशि 50,000 रुपए की छूट सीमा से अधिक न हो। यह भी ध्यान दिया जा सकता है कि एक बार 50,000 रुपए की कुल सीमा का उल्लंघन हो जाने पर, पूरी कुल राशि पर टैक्‍स लगाया जाता है, न कि केवल 50,000 रुपए से अधिक की राशि पर। तो, इस उदाहरण में, 57,100 रुपए की पूरी राशि पर ए के हाथों टैक्‍स लगाया जाएगा।

दूसरी ओर, जहां उपहार गैर-मौद्रिक संपत्ति के रूप में प्राप्त होता है, जैसे कि अचल संपत्ति या निर्दिष्ट चल संपत्ति, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, अचल संपत्ति और उचित बाजार मूल्य (एफएमवी) के लिए स्टांप शुल्क मूल्य के आधार पर टैक्‍स योग्यता तय की जाती है। एक उपहार बिना प्रतिफल के, जहां अचल संपत्ति के मामले में स्टांप शुल्क मूल्य और चल संपत्ति के मामले में एफएमवी 50,000 रुपए से अधिक है, ऐसे स्टांप शुल्क मूल्य या एफएमवी प्राप्तकर्ता पर कर लगाया जाएगा।

इन पर नहीं लगता टैक्‍स
हालांकि, यदि संपत्ति अपर्याप्त प्रतिफल के बदले करदाता द्वारा प्राप्त की जाती है, तो अचल संपत्ति के मामले में, यदि स्टांप शुल्क मूल्य और खरीद मूल्य के बीच का अंतर ₹50,000 से अधिक और खरीद मूल्य के 10 फीसदी से अधिक है, तो इस तरह के अंतर के बीच स्टांप शुल्क मूल्य और खरीद मूल्य रिसीवर के हाथों में कर लगाया जाता है। यदि कोई अन्य निर्दिष्ट चल संपत्ति अपर्याप्त प्रतिफल के लिए प्राप्त होती है, तो भुगतान किए गए प्रतिफल से अधिक एफएमवी पर प्राप्तकर्ता के हाथों कर लगाया जाता है, यदि ऐसा अंतर 50,000 से अधिक है।

ऐसी कुछ स्थितियां हैं जहां उपहार आयकर के अधीन नहीं हैं जैसे कि जहां धन या संपत्ति किसी रिश्तेदार से प्राप्त होती है, किसी की शादी के अवसर पर, वसीयत के तहत या विरासत के माध्यम से। यहां ‘रिश्तेदार’ शब्‍द को पति या पत्नी, भाई, बहन, माता-पिता, करदाता और पति या पत्नी के वंशज/वंशज से परिभाषित किया गया है। शादी के अवसर पर रिश्तेदार या गैर-रिश्तेदार से प्राप्त सभी उपहार कर से मुक्त हैं। लेकिन शादी के अलावा अन्य अवसरों जैसे जन्मदिन, सालगिरह आदि पर गैर-रिश्तेदारों से उपहार पर छूट तभी मिलेगी जब ऐसी राशि एक वर्ष में 50,000 रुपए की कुल सीमा से अधिक न हो।

पढें Personal Finance समाचार (Personalfinance News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट