हड़बड़ी में कभी रीडीम न करें Mutual Funds, इन बातों का रखें ख्याल, वरना हो सकता है पैसों का नुकसान!

म्युचुअल फंड जैसी कंपनियों में निवेश करते समय जल्‍दबाजी नहीं करनी चहिए। निवेश से पहले आपको आयकर विभाग द्वारा बनाए गए नियम के बारे में जान लेना चाहिए।

हड़बड़ी में कभी रीडीम न करें Mutual Funds, इन बातों का रखें ख्याल (File Photo)

आज के समय में लोग अपने पैसों को निवेश कर ज्‍यादा मुनाफा पाने के बारे में सोच रहे हैं। इस कारण से निवेश की कई कंपनियां लोगों के लिए कई स्‍कीम लेकर आती रहती हैं। निवेश करने के लिए किसी शाखा में जाने की आवश्‍यकता नहीं होती है, आज के समय अब घर बैठे ही निवेश किया जा सकता है। लेकिन म्युचुअल फंड जैसी कंपनियों में निवेश करते समय जल्‍दबाजी नहीं करनी चहिए। निवेश से पहले आपको आयकर विभाग द्वारा बनाए गए नियम के बारे में जान लेना चाहिए।

इन नियमों को जानकर निवेश करने पर आपका आवेदन फॉर्म सही रहता है और साथ ही निवेश का अधिकतम लाभ मिलता है। इसके तहत तभी फंड को रिडीम करना चाहिए जब लक्ष्‍य पूरा हो चुका हो। आइए जानते हैं किन बातों का ख्‍याल रखें तो आपका पैसा नुकसान होने से बच सकता है और साथ ही अधिकतम लाभ भी मिल सकता है।

निवेश का दिन
अगर आप अपना आवेदन सप्ताह के अंत में, यानी गुरुवार या शुक्रवार को मोचन के लिए जमा करते हैं, तो आपके खाते में पैसा जमा होने में दो दिन अतिरिक्त लग सकते हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि यदि धनराशि को लगाया जाता है तो आपके बैंक खाते में धनराशि जोड़ने में व्यापार दिवस और 3 दिन (T+3) लगते हैं। हालाकि इस दौरान इसमें कोई अवकाश शामिल नहीं हैं। इसलिए सप्‍ताह के शुरूआत में ही पैसे का निवेश करना चाहिए।

समय का विशेष ध्‍यान
निवेश का समय भी सही होना चाहिए। अगर आप दोपहर 3 बजे से पहले ऑर्डर देते हैं, तो यह उसी दिन के एनएवी पर आपके ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करेगा। यदि आप देरी करते हैं और इसे दोपहर 3 बजे के बाद रखते हैं तो आपका लेनदेन अगले दिन के एनएवी पर संसाधित किया जाएगा। इसी तरह लिक्विड और ओवरनाइट फंड के लिए कट ऑफ टाइम दोपहर 1.30 बजे रखा गया है। अगर आप इसे दोपहर 1.30 बजे के बाद बेचते हैं तो अगले दिन की एनएवी लागू होगी। इसलिए जरुरी है कि सोचकर निवेश किया जाए।

निवेश की अवधि
यह ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है कि आप कितने समय तक निवेश करना चाहते हैं। कम समय के लिए पैसा निवेश कर रहे है तो उसी तरह की पॉलिसी लेनी चाहिए ताकि कोइ अतिरिक्त भार न पडे। वहीं अगर आप लंबे समय के निवेश को देख रहे हैं तो अधिक पैसा के साथ निवेश कर सकते हैं, जिससे आपको मुनाफा भी अधिक मिलता है।

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टैक्‍स की दर
इक्विटी फंड पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन केवल 1 लाख रुपये तक टैक्स-फ्री है। 1 लाख रुपये से अधिक की राशि के लिए बिना इंडेक्सेशन के लाभ के कर की दर 10 प्रतिशत है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इंडेक्सेशन के लाभ के साथ 20 प्रतिशत की दर से कर योग्य है।

निकासी के दौरान क्‍या है नियम
अंतिम लेकिन कम से कम निकास शुल्क पर विचार न करें। अगर आप 1 साल से कम समय में इक्विटी फंड से बाहर निकलते हैं तो इस पर 1 फीसदी का एग्जिट चार्ज लगता है। डेट फंडों के मामले में, अल्ट्रा-शॉर्ट अवधि और लिक्विड फंड जैसे शॉर्ट-टर्म फंड में एक्जिट लोड शून्य है, लेकिन कम लिक्विडिटी वाले फंड जैसे क्रेडिट रिस्क फंड में लगाया जा सकता है।

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