आपके बाद पत्‍नी और बच्‍चों से नहीं वसूला जा सकता है लोन, जानि‍ए क्‍या कहता यह कानून

आप अपने जीवन बीमा को विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम यानी एमडब्‍ल्‍यूपी के दायरे में लाने पर भी विचार कर सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्‍लेम दावा राशि अकेले आपकी पत्नी और बच्चों को मिले।

MWP Act LIC
आप अपनी इंश्‍योरेंस पॉलिसी को विवाहित महिला संपत्‍त‍ि अध‍िनियम से लिंक‍ करा सकते हैं। ताकि पॉलिसी होल्‍डर के साथ अनहोनी होने पर सारा रुपया पत्‍नी और बच्‍चे को ही मिले। Express photo by Nirmal Harindran

कोवि‍ड 19 की तीसरी लहर की बात हो रही है, जो देश में कभी भी एंट्री कर सकती है। चारों और महामारी का प्रकोप देखते हुए कई परिवारों के मुश्किल से ठीक हुए घावों को फिर से हरा का दिया है। भारत में महामारी की दूसरी लहर ने घर के कमाने वाले, गृहिणी, बुजुर्ग किसी को नहीं बख्शा। यहां तक कि जब कोविड-19 प्रभावित परिवारों का दुख सामने आता है तो उन बुरे अनुभवों से सबक लेने की जरुरत है। खासकर आर्थिक मोर्चे पर। कई लोगों के लिए, अपने परिवारों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने का मतलब पर्याप्त जीवन बीमा कवर खरीदना होता है। सवाल यह है कि क्‍या है काफी है।

इसके लिए एक सिचुएशन को समझने का प्रयास करते हैं। आपको इमरजेंसी में मोटी राशि‍ का पर्सनल लोन लेते हैं। इसके अलावा, आपके पास घरेलू खर्च और बच्चों की स्कूल फीस के रूप में पर्याप्त मासिक खर्च है। फिर भी, आप इस बात से रिलैक्‍स रहते हैं कि 1 करोड़ रुपए का टर्म इंश्योरेंस कवर दुर्भाग्यपूर्ण निधन के बाद परिवार के बचाव में आएगा। लेकिन आप यह आत्‍मविश्‍वास तब टूट सकता है। इसका कारण है ऐसी परिस्थितियों में आपके लेनदारों का बीमा से होने वाली इनकम पर पहला क्‍लेम होगा। वैसे आप एक ऐसी पॉसिली भी ले सकते हैं जिसमें आपकी मौत के बाद कर्जदारों का कर्ज भी उतर जाए और आपका परिवार भी आर्थ‍िक रूप से सुरक्षि‍त रह सके। वहीं आप अपने जीवन बीमा को विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम यानी एमडब्‍ल्‍यूपी के दायरे में लाने पर भी विचार कर सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्‍लेम दावा राशि अकेले आपकी पत्नी और बच्चों को मिले। आइए आपको भी बताते हैं इसके बारे में।

इसमें पत्‍नी और बच्‍चों को मिलता है दावा : किसी व्यक्ति की मृत्यु या दिवालिया होने की स्थिति में, उसकी संपत्ति का उपयोग पहले कर्ज का भुगतान करने के लिए किया जाता है। लेनदारों की बकाया राशि के निपटारे के बाद ही परिवार के सदस्यों या कानूनी वारिसों को उनकी संपत्ति से शेष संपत्ति का उपयोग करने का अध‍िकार मिलता है। हालांकि, एमडब्‍ल्‍यूपी के प्रावधानों के कारण, परिवार के अधिकारों और हितों की रक्षा की जाती है। इसमें एक विवाहित व्यक्ति द्वारा खरीदी गई ऐसी पॉलिसी, उसकी संपत्ति का हिस्सा नहीं बनती है और इसलिए, उसके कर्ज और देनदारियों को पूरा करने के उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

ट्रस्‍ट का होता है निर्माण : एमडब्‍ल्‍यूपी के तहत पॉलिसी खरीदने से एक ट्रस्ट का निर्माण होता है, जिसके लिए दावे की आय को ट्रांसफर किया जाता है। ट्रस्ट के लाभार्थी पॉलिसीधारक की पत्नी और बच्चे हैं। परिपक्वता या मृत्यु लाभ, लाभार्थियों को ट्रांसफर होता है। जीवन बीमा कंपनी से प्राप्त आय पर लेनदार का कोई दावा नहीं होगा। जानकारों के अनुसार इस अधिनियम के दायरे में पॉलिसी खरीदना पॉलिसीधारक की पत्नी और बच्चों के हितों की भी रक्षा करता है यदि वे संयुक्त परिवार में रहते हैं। उसे अपनी पत्नी और बच्चों के बारे में चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। वहीं पारीवारिक विवादों के बावजूद, वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, इस तरह के जीवन बीमा से पैसा निश्चित रूप से उनके खातों में पहुंच जाएगा। यदि आप यूनिट-लिंक्ड बीमा पॉलिसियों (यूलिप) और अपने रिटायरमेंट के लिए पारंपरिक बंदोबस्ती योजनाओं में ‘निवेश’ कर रहे हैं तो उसमें लाभ नहीं मिलेगा।

कुछ इस तरह की हैं शर्तें : यह मुख्य रूप से विवाहित पुरुषों के उद्देश्य से है जो यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि केवल उनकी पत्नियों और बच्चों को ही उनकी जीवन बीमा पॉलिसियों का क्‍लेम मिले। आपको यह स्‍पेसिफाई करना होगा कि क्या पॉलिसी केवल आपकी पत्नी और बच्चों के लाभ के लिए ली जा रही है। यह अधिनियम तलाक जैसी अन्य स्थितियों को भी ध्यान में रखता है। एक विधुर और एक तलाकशुदा भी अपने बच्चों के लाभ के लिए ऐसी पॉलिसी खरीद सकते हैं।” एक और पूर्व शर्त यह है कि पॉलिसी खरीदने के पीछे आपका इरादा अपने उधारदाताओं को धोखा देने का नहीं होना चाहिए। यदि पॉलिसी की सदस्यता लेने का उद्देश्य लेनदारों को धोखा देना था, तो इस धारा द्वारा दी गई सुरक्षा छीन ली जाती है। साथ ही, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि पॉलिसी खरीदते समय आपकी पॉलिसी को अधिनियम के तहत लाया जाए।

 

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