Income Tax Refunds Delay : इनकम टैक्स रिफंड का इंतजार कर रहे लाखों टैक्सपेयर्स के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है। सरकार ने संसद में बताया है कि 24 लाख से ज्यादा इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) ऐसे हैं, जिनकी प्रोसेसिंग 90 दिन से भी ज्यादा समय से अटकी हुई है। सरकार ने एक सवाल के लिखित जवाब में इस देरी की वजह साफ कर दी है। लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि लंबे समय से अटके रिफंड को तेजी से निपटाने के लिए कोई विशेष उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
संसद में क्या उठा सवाल
राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने सरकार से पूछा कि क्या दिसंबर 2025 में बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को अचानक मैसेज भेजकर तीन से चार दिन के भीतर रिटर्न रिवाइज करने को कहा गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ईमानदार टैक्सपेयर्स, खासकर सीनियर सिटीजन्स के रिफंड बिना साफ कारण बताए क्यों रोके जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी मांगी कि 31 जनवरी 2026 तक 90 दिन से ज्यादा समय से पेंडिंग रिटर्न की तादाद कितनी है।
सरकार ने क्या जवाब दिया
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जवाब में बताया कि रिफंड में देरी किसी सामूहिक कार्रवाई या ईमानदार टैक्सपेयर्स को निशाना बनाने की वजह से नहीं हो रही है। इसके पीछे मुख्य कारण टेक्नोलॉजी आधारित रिस्क एनालिसिस और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ‘नज’ (NUDGE) कंप्लायंस कैंपेन है। सरकार के मुताबिक इस कैंपेन का मकसद बाद में कार्रवाई करने की जगह लोगों को खुद से सही जानकारी देने के लिए प्रेरित करने पर आधारित है।
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“रिवाइज रिटर्न” के मैसेज क्यों मिले
सरकार ने बताया कि जिन लोगों को रिटर्न रिवाइज करने का मैसेज भेजे गए, वे NUDGE कैंपेन के तहत चुने गए थे। यह एक डेटा आधारित पहल है, जिसमें एनालिटिक्स, व्यावहारिक अध्ययन और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मकसद टैक्सपेयर्स को अपनी मर्जी से नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना है। यानी सीधे नोटिस भेजने या कार्रवाई करने के बजाय, पहले टैक्सपेयर को खुद अपनी गलती सुधारने का मौका दिया जाता है।
किन मामलों को रिस्क कैटेगरी में रखा गया
सरकार के अनुसार, जिन टैक्सपेयर्स को चुना गया, उनमें कुछ खास तरह की गड़बड़ियां पाई गई थीं। इनमें विदेशी संपत्ति या विदेशी आय का खुलासा न करना, गलत या जरूरत से ज्यादा कटौती और छूट का दावा करना, और सेक्शन 80G, 80GGC या 80E के तहत गलत क्लेम करना शामिल है। ऐसे मामलों में सिस्टम अलर्ट देता है और संबंधित व्यक्ति को रिटर्न दोबारा देखने या सुधारने के लिए कहा जाता है।
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क्या है SAKSHAM फ्रेमवर्क का मतलब
NUDGE कैंपेन को सात फेज वाले SAKSHAM फ्रेमवर्क से लागू किया जा रहा है। इसमें पहले अलग-अलग स्रोतों से डेटा इकट्ठा किया जाता है, फिर उसका विश्लेषण कर संदिग्ध मामलों की पहचान होती है। इसके बाद टैक्सपेयर्स से संपर्क कर उन्हें गाइड किया जाता है और पूरे प्रोसेस की निगरानी की जाती है। सरकार का दावा है कि यह तरीका पारदर्शिता के साथ टैक्स सिस्टम पर भरोसा बढ़ाने के लिए बनाया गया है।
इस सक्षम (SAKSHAM) स्ट्रैटजी के 7 स्टेप्स इस प्रकार हैं –
- संकलन (Sankalan) यानी कई स्रोतों से आंकड़े जमा करना।
- अनुसंधान (Anusandhan) यानी आंकड़ों का विश्लेषण और रिस्क की पहचान।
- क्रियान्वयन (Kriyanvyan) यानी प्राप्त जानकारी के आधार पर कार्रवाई।
- संपर्क (Sampark) यानी टैक्सपेयर्स के साथ संवाद।
- हस्तक (Hastak) यानी गड़बड़ी दूर करने में टैक्सपेयर्स की मदद करना।
- अधिकार (Adhikaar) यानी टैक्सपेयर्स के अधिकारों और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना, और
- मूल्यांकन (Mulyankan) यानी लगातार मॉनिटरिंग और आकलन (evaluation)
अब तक क्या असर पड़ा
वित्त मंत्रालय ने बताया कि पिछले दो सालों में इस अभियान के चलते 1.11 करोड़ से ज्यादा अपडेटेड या रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किए गए। इसके जरिये सेक्शन 140B के तहत 6,976.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स भुगतान किया जा चुका है। अकेले दिसंबर 2025 में ही टैक्स रिफंड के क्लेम में 1,834.09 करोड़ रुपये की कमी आई है। इस कैंपेन का सरकार की रेवेन्यू पर कुल असर (overall revenue impact) 8,810.59 करोड़ रुपये का रहा है। सरकार के मुताबिक कुल मिलाकर इससे टैक्स सिस्टम में अनुशासन बढ़ा है।
कितने रिटर्न अब भी अटके
सरकार ने माना कि असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए दाखिल 8.79 करोड़ रिटर्न में से 24,64,044 रिटर्न ऐसे हैं, जिनका प्रोसेस 90 दिन से ज्यादा समय से पेंडिंग है। इसका मतलब है कि लाखों टैक्सपेयर अभी भी तय समय से काफी ज्यादा इंतजार कर रहे हैं।
रिफंड में देरी के लिए कोई विशेष उपाय नहीं
सरकार ने अपने जवाब में एक अहम बात यह भी साफ कर दी कि फिलहाल बकाया रिफंड को तेजी से निपटाने के लिए किसी विशेष उपाय या समयबद्ध योजना पर विचार नहीं किया जा रहा है। फिर चाहे वो सीनियर सिटीजन्स की बात हो या रिफंड में देरी का सामना कर रहे दूसरे टैक्सपेयर्स के मामले।
