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देर से फाइल किया है इनकम टैक्‍स रिटर्न, जानिए क्‍या नई कर व्‍यवस्‍था के तहत ले सकते हैं लाभ

देर से आईटीआर फाइल करने के साथ ही आईटीआर का लाभ लेने के लिए आपको पुराने कर व्‍यवस्‍था के तहत न केवल टैक्‍स का भुगतान करना पड़ सकता है, बल्कि उच्‍च टैक्‍स भी देना पड़ सकता है।

देर से फाइल किया है इनकम टैक्‍स रिटर्न, जानिए क्‍या नई कर व्‍यवस्‍था के तहत ले सकते हैं लाभ
देर से ITR फाइल किया है तो क्‍या ले सकते हैं नई कर व्‍यवस्‍था के तहत लाभ (फोटो-Freepik)

अगर आपने 31 जुलाई, 2022 की समय सीमा से पहले अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल भरने से चूक गए हैं और आपने नई कर व्‍यवस्‍था के तहत अपने टैक्‍स की योजना बना रखी है तो आप वर्तमान आयकर कानूनों के अनुसार, विलंबित ITR फाइल करते समय नई टैक्‍स व्‍यवस्‍था के तहत लाभ का दावा नहीं कर सकते हैं।

देर से आईटीआर फाइल करने के साथ ही आईटीआर का लाभ लेने के लिए आपको पुराने कर व्‍यवस्‍था के तहत न केवल टैक्‍स का भुगतान करना पड़ सकता है, बल्कि उच्‍च टैक्‍स भी देना पड़ सकता है।

नई कर व्‍यवस्‍था के तहत आईटीआर फाइल करने का क्‍या है नियम

नई कर व्‍यवस्‍था के तहत आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा चूक जाने के बाद आईटीआर फाइल करने पर लाभ नहीं दिया जा सकता है। केवल पुरानी कर व्‍यवस्‍था के तहत आईटीआर दाखिल करके इसका लाभ लिया जा सकता है। वित्त विधेयक, 2020 ने नई आयकर व्यवस्था की शुरुआत की और यह वित्त वर्ष 2020-21 (1 अप्रैल, 2020) से लागू है।

इस लाभ से रह सकते हैं वंचित

वित्त विधेयक के तहत यह जानकारी दी जाती है कि नई व्यवस्था के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए, एक व्यक्ति को आयकर अधिनियम की धारा 139 (1) के तहत नियत तारीख के भीतर अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए। अगर आयकर रिटर्न देर से दाखिल किया जाता है, तो करदाता कम टैक्‍स दरों के लाभ का दावा करने में सक्षम नहीं होगा जैसा कि नई कर व्यवस्था में प्रदान किया गया है और पुरानी आयकर दरें लागू होंगी।

समस्‍याओं का सामना करना पड़ सकता है

अधिनियम की धारा 139(4) के तहत विलंबित आईटीआर दाखिल करने पर कम करों का लाभ उपलब्ध नहीं होगा, देर से आईटीआर फाइल करने वालों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, अगर उन्होंने नई कर व्यवस्था के अनुसार अपने टैक्‍स की प्‍लानिंग की है।

पुरानी कर व्‍यवस्‍था के तहत ही दाखिल करना होगा आईटीआर

ऐसे में टैक्‍सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे पुरानी कर व्‍यवस्‍था के तहत आईटीआर फाइल करें और फिर आईटीआर दाखिल करें ताकि उन्‍हें लाभ मिल सके। पुरानी कर व्‍यवस्‍था के तहत आईटीआर दाखिल करने से कर दायित्वों में वृद्धि हो सकती है और अतिरिक्त कर भुगतान पर देर से भुगतान के लिए उच्च ब्याज दर के साथ-साथ धारा 234F के तहत विलंब शुल्क भी हो लग सकता है।

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First published on: 03-10-2022 at 10:56:30 am
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