scorecardresearch

PPF Scheme: टैक्स फ्री भुगतान से लेकर ज्यादा ब्याज दर तक, आज भी PPF है FD के मुकाबले निवेश का बढ़िया विकल्प

PPF Scheme: पीपीएफ में निवेश कर आप लंबी अवधि में बड़ा फंड जमा कर सकते हैं।

PPF Scheme: टैक्स फ्री भुगतान से लेकर ज्यादा ब्याज दर तक, आज भी PPF है FD के मुकाबले निवेश का बढ़िया विकल्प
PPF: पीपीएफ में 15 साल का लॉकइन पीरियड होता है। (Photo: Freepik)

PPF Scheme: निवेश किसी भी व्यक्ति के बेहद जरूरी होता है। ये अचानक आए खर्चों या फिर रिटायरमेंट प्लानिंग में आपकी मदद करता है। वहीं,ज्यादातर भारतीय बैंक एफडी में निवेश करना पसंद करते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण कि इसमें कोई भी रिस्क नहीं होता है, जिस कारण पैसे डूबने की संभावना भी न के बराबर है। आज हम आपको एक ऐसे निवेश के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग और लंबी अवधि के निवेश के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है और रिस्क भी एफडी से कम होता है।

हम बात कर रहे हैं पीपीएफ की, जोकि लंबी अवधि के निवेश और टैक्स सेविंग जैसे फीचर्स की वजह से निवेशकों के बीच में काफी लोकप्रिय है। इसमें आप अपनी सुविधा के मुताबिक 15 से 25 साल की अवधि के लिए निवेश कर सकते हैं। इसमें नियमित निवेश  करने और चक्रवृद्धि के कारण आप एक बड़े फंड जमा कर सकते हैं।

पीपीएफ के फायदे

  • पीपीएफ की ब्याज दर में बाजार की परिस्थतियों के मुताबिक हर तिमाही में बदलाव किया जाता है। मौजूदा समय में पीपीएफ पर 7.1 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है।
  • पीपीएफ पर सरकार की ओर से कोई भी टैक्स नहीं लिया जाता है। इसका मतलब यह है कि पीपीएफ की मैच्योरिटी पर मिले रुपए पर आपको कोई भी टैक्स का भुगतान नहीं करना है। हालांकि यहां यह ध्यान रखना की जरूरत है कि इसमें आपको एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपए तक निवेश करने पर ही टैक्स में छूट मिलती है।   
  • एनपीएस में न्यूनतम 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इसका मतलब यह है कि एक बार निवेश करने पर आपको कम से कम 15 सालों के लिए निवेशित रहना होता है। फिर आप पीपीएफ को 5-5 साल की अवधि में 30 साल तक के लिए बढ़ा सकते हैं।
  • पीपीएफ में आप निवेश शुरू करने के तीन साल बाद इस पर लोन भी ले सकते हैं। हालांकि इसमें आपकी निवेशित राशि के 25 फीसदी तक का ही लोन दिया जा सकता है।

कैसे होता है ब्याज का निर्धारण?

नेशनल सेविंग इंस्टीट्यूट के अनुसार, पीपीएफ पर सरकार ब्याज हर महीने की 5 वीं तारीख या फिर हर महीने की आखिरी के न्यूनतम बैलेंस पर कैलकुलेट किया जाता है।

पढें Personal Finance (Personalfinance News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.