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Paytm, BHIM करते हैं इस्तेमाल? UPI ट्रांजेक्शन पर सरकार ने लगाई यह बंदिश

Paytm, BHIM: एनपीसीआई के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में यूपीआई लेनदेन, पिछले महीने के मुकाबले 312 मिलियन से 30% बढ़कर 405 मिलियन हो गया और साल-दर-साल 1250% की बढ़ोतरी हुई हुई।

संशोधन के बाद 24 घंटे में पीयर-टू-पीयर (पी 2 पी) सेगमेंट के लिए एक बैंक अकाउंट से 10 ट्रांजेक्शन की जा सकती हैं।

आरबीआई ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) सिस्टम के माध्यम से मोबाइल वॉलेट्स और बैंक खातों और ई-वेल्ट्स के बीच पैसा ट्रांसफर करना सक्षम करने के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी करने के बाद, नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया(एनपीसीआई) ने नए चेक और बेलेंस पेश किए हैं। यूपीआई में वास्तविक लेनदेन को प्रोत्साहित करने और तर्कसंगतता लाने के लिए, यूपीआई लेनदेन की लिमिट को संशोधित किया है। यूपीआई प्लेटफॉर्म को मैनेज करने वाली ऑर्गेनाइजेशन ने मेंबर बैंकों को इसे लेकर सर्कुलर भेजा है। यूपीआई धोखाधड़ी और जोखिम प्रबंधन प्रणाली पर आवश्यक परिवर्तन लागू किए गए हैं और 21 अक्टूबर, 2018 से प्रभावी हैं।

संशोधन के बाद 24 घंटे में पीयर-टू-पीयर (पी 2 पी) सेगमेंट के लिए एक बैंक अकाउंट से 10 ट्रांजेक्शन की जा सकती हैं। पहली ट्रांजेक्शन से टाइम स्टार्ट होगा। BHIM, Google पे और पेटीम जैसे ई-वेल्ट्स से यूपीआई का इस्तेमाल कर फंड ट्रांसफर और रिसीव किया जा सकता है। पहले यह ट्रांजेक्शन की लिमिट 20 थी जिसे अब NCPI ने घटाकर 10 कर दिया है। एनआईपीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप असबे ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि एनपीसीआई यूपीआई के माध्यम से आने वाले वास्तविक ट्रेफिक की दिशा में काम कर रहा है। अब यूपीआई 2 साल का हो गया है, इस पर अब वास्तविक ट्रैफिक बढ़ रहा है। इसलिए 24 घंटे में एक खाते से 10 ट्रांजैक्शन काफी हैं। वहीं पर्सन टू मर्चेंट (P2M) की ट्रांजेक्शन की कोई लिमिट नहीं।

एनपीसीआई के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में, यूपीआई लेनदेन पिछले महीने के मुकाबले 312 मिलियन से 30% बढ़कर 405 मिलियन हो गया – और साल-दर-साल 1250% की बढ़ोतरी हुई हुई। इस प्लेटफॉर्म पर 120 से ज्यादा बैंक हैं। यूपीआई ने सितंबर में 59,835 करोड़ रुपये और अगस्त में 54,212 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। इसमें एक बड़ा हिस्सा पी 2 पी सेगमेंट में था। प्लेटफॉर्म पर थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा यूजर्स को ऑफर दिए जा रहे थे इसकी वजह से प्लेटफॉर्म पर ज्यादा तनाव हो गया है। इसी की वजह से NCPI ने डेली की ट्रांजेक्शन लिमिट को घटा दिया है।

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