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और खस्ता हुई भारतीय कार इंडस्ट्री की हालत, जुलाई में 31 प्रतिशत की गिरावट

विविध श्रेणियों में कुल वाहन बिक्री जुलाई में 18.71 प्रतिशत गिरकर 18,25,148 वाहन रही जो जुलाई 2018 में 22,45,223 वाहन थी। सियाम के मुताबिक सभी वाहन श्रेणियों में जुलाई में गिरावट दर्ज की गयी है।

Author नई दिल्ली | August 13, 2019 1:11 PM
भारतीय कार इंडस्ट्री की हालत खस्ताहाल

यात्री वाहनों की बिक्री जुलाई में लगातार नौवें महीने गिरी है। यह 30.98 प्रतिशत घटकर 2,00,790 वाहन रही है जो जुलाई 2018 में 2,90,931 वाहन थी।
भारतीय वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम ने मंगलवार को इस संबंध में आंकड़े जारी किए। समीक्षावधि में घरेलू बाजार में कार की बिक्री 35.95 प्रतिशत टूटकर 1,22,956 वाहन रही। जुलाई 2018 में 1,91,979 वाहन थी। इसी तरह मोटरसाइकिल की घरेलू बिक्री पिछले महीने 9,33,996 इकाई रही जो जुलाई 2018 की 11,51,324 इकाई बिक्री के मुकाबल 18.88 प्रतिशत कम है। जुलाई में दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री 15,11,692 वाहन रही। जुलाई 2018 में यह आंकड़ा 16.82 प्रतिशत अधिक यानी 18,17,406 वाहन था। वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में भी समीक्षावधि के दौरान गिरावट देखी गयी है। यह 25.71 प्रतिशत घटकर 56,866 वाहन रही जो पिछले साल जुलाई में 76,545 वाहन थी।

विविध श्रेणियों में कुल वाहन बिक्री जुलाई में 18.71 प्रतिशत गिरकर 18,25,148 वाहन रही जो जुलाई 2018 में 22,45,223 वाहन थी। सियाम के मुताबिक सभी वाहन श्रेणियों में जुलाई में गिरावट दर्ज की गयी है। चीन ने भी बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भारत की चिंताओं के समाधान का सोमवार (12 अगस्त) को वादा किया। साथ ही उसने द्विपक्षीय वाणिज्यिक रिश्तों में संतुलन कायम करने के लिए औद्योगिक उत्पादन, पर्यटन और सीमा व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया है।

चीन के साथ भारत व्यापार असंतुलन का मुद्दा उठाता रहा है। भारत का व्यापार घाटा (निर्यात के मुकाबले आयात) पिछले साल बढ़कर 57.86 अरब डॉलर तक पहुंच गया। 2017 में यह घाटा 51.72 अरब डॉलर था। दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 95.5 अरब डॉलर का है।  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन की अपनी मौजूदा यात्रा के दौरान बातचीत एवं द्विपक्षीय कार्यक्रमों में व्यापार घाटे का मुद्दा उठाया। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनंिफग की दूसरी अनौपचारिक बातचीत से जुड़ी तैयारियों के सिलसिले में यहां आए हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन आर्थिक संबंधों में ”थोड़ी प्रगति” हुई है। द्विपक्षीय व्यापार भी बढ़ा है लेकिन हमारा घाटा भी और बढ़ गया है। यह ंिचता का विषय है।

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