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पनामा पेपर्स: सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को पक्ष बनाए जाने पर मांगा जवाब

केंद्र ने तीन अक्तूबर को अदालत को सूचित किया था कि विदेशी बैंकों में भारतीयों द्वारा अवैध रूप से रखे गए 8,186 करोड़ रुपए को कर के दायरे में लाया गया है।
Author नई दिल्ली | November 24, 2016 20:57 pm
पीठ ने कहा कि इस मामले में कई सारे किंतु-परंतु हैं।

उच्चतम न्यायालय ने बाजार नियामक सेबी की उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें उसने कहा है कि पनापा पेपर्स मामले में अदालत की निगरानी वाली सीबीआई की जांच की मांग करते हुए दायर जनहित याचिका में उसे एक पक्ष के तौर पर बेवजह घसीटा गया है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमितव रॉय की पीठ ने कहा, ‘जरूरत यह है कि याचिकाकर्ता चार सप्ताह के भीतर यह दिखाते हुए हलफनामा दायर करे कि सेबी कैसे इस जनहित याचिका से संबंधित है।’ शीर्ष अदालत का यह निर्देश उस वक्त आया जब सेबी की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील अरविंद दातर ने आरोप लगाया कि मार्केट नियामक की पनामा पेपर्स लीक मामले में कोई भूमिका नहीं है तथा उसे बिना वजह घसीटा गया है। उधर, केंद्र की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलीशीटर जनरल तुषार मेहता ने जनहित याचिका को खारिज करने की मांग की। यह जनहित याचिका वकील एम एल शर्मा ने दायर की है।

मेहता ने कहा कि सीबीडीटी, आरबीआई, वित्तीय खुफिया इकाई और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों वाले बहु-एजेंसी समूह (मैग) का गठन पहले ही कर दिया गया जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पनामा पेपर्स में जिन भारतीयों के नाम आए हैं उनके खिलाफ ‘तेज और समन्वित’ जांच सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि ‘मैग’ ने उच्चतम न्यायालय द्वारा कालेधन पर गठित एसआईटी को पांच रिपोर्ट सौंप दी है। केंद्र ने बीते तीन अक्तूबर को अदालत को सूचित किया था कि विदेशी बैंकों में भारतीयों द्वारा अवैध रूप से रखे गए 8,186 करोड़ रुपए को कर के दायरे में लाया गया है।

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