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मूडीज रेटिंग सुधार पर सरकार के उत्साह की चिदंबरम ने उड़ाई खिल्ली

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मूडीज के रेटिंग बढ़ाने पर सरकार के उत्साहित होने की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि कुछ महीने पहले इसी सरकार ने इस रेटिंग एजंसी के तौरतरीकों पर सवाल उठाए थे।

Author मुंबई | November 19, 2017 2:26 AM
P Chidambaram, UPA 2, PM Narendra Modi, BJP, BJP Government, Modi government, GST, Demonetisation, 2G, Corruption, India news, Jansatta, Hindi newsकांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम।

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मूडीज के रेटिंग बढ़ाने पर सरकार के उत्साहित होने की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि कुछ महीने पहले इसी सरकार ने इस रेटिंग एजंसी के तौरतरीकों पर सवाल उठाए थे। टाटा लिटरेचर लाइव में उन्होंने यह बात कही। शक्तिकांत दास (आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव) ने मूडीज के रेटिंग के तरीके पर सवाल उठाते हुए लंबा पत्र लिखा था। उन्होंने मूडीज के रेटिंग के तरीके को कमजोर बताते हुए सुधार करने की मांग की थी।  मूडीज के तेज वृद्धि का हवाला दिए जाने के बारे में पूछने पर चिदंबरम ने कहा कि इसी एजंसी और सरकार का चालू वित्त वर्ष का वृद्धि अनुमान 6.7 फीसद है। आर्थिक वृद्धि दर 2015-16 में आठ फीसद थी। 2016-17 में यह 6.7 फीसद थी और 2017-18 में यह 6.7 फीसद है। यह उन्नति है या अवनति, आप ही तय करें। उनके अनुसार किसी भी अर्थव्यवस्था की स्थिति के लिए तीन कारक अहम हैं- समग्र तय पूंजी निर्माण, कर्ज वृद्धि और रोजगार। ये तीनों ही सूचकांक लाल रेखा में हैं।

उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि समग्र तय पूंजी निर्माण अपने सर्वोच्च स्तर से सात-आठ अंक नीचे है और निकट भविष्य में इसमें सुधार के भी चिह्न नहीं हैं। निजी निवेश पिछले सात साल के निचले स्तर पर है। कई परियोजनाएं रुकी हुई हैं और वे दिवाला व शोधन संहिता के विकल्प का चयन कर रही हैं। इन सबसे रोजगार के अवसर कम होने वाले हैं। कर्ज वृद्धि भी पिछले दो दशक के निचले स्तर पर है। यह सालाना छह फीसद की दर से बढ़ रही है पर मध्यम श्रेणी के उद्यमों के लिए इसकी वृद्धि दर नकारात्मक है। रोजगार सृजन में भी कमी है। सरकार इसके बारे में सही और भरोसेमंद आंकड़ा नहीं दे रही है। सेंटर फोर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने कहा था कि जनवरी से जून 2017 के बीच 19,60,000 नौकरियां गईं।

रेटिंग के तरीके पर उठा था सवाल

चिदंबरम ने याद दिलाया कि इसी सरकार ने कुछ महीने पहले मूडीज की रेटिंग पद्धति को लेकर सवाल उठाया था। शक्तिकांत दास (आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव) ने मूडीज की रेटिंग के तरीके पर लंबा पत्र लिख उसे कमजोर बताते हुए सुधार करने की मांग की थी।

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