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विपक्ष का आरोप, सरकार खत्म करना चाहती है EPF

राज्यसभा में गुरुवार को वाम सहित विपक्षी दलों ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की ब्याज दर घटाने के वित्त मंत्रालय के निर्णय को ‘एकपक्षीय व अलोकतांत्रिक’ करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया।
Author नई दिल्ली | April 29, 2016 01:05 am
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)

राज्यसभा में गुरुवार को वाम सहित विपक्षी दलों ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की ब्याज दर घटाने के वित्त मंत्रालय के निर्णय को ‘एकपक्षीय व अलोकतांत्रिक’ करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कारोबार करने की सुविधा के नाम पर ईपीएफ को ही खत्म करने का प्रयास कर रही है।

माकपा के तपन कुमार सेन ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि श्रम मंत्री के नेतृत्व वाली ईपीएफओ की त्रिपक्षीय समिति ने ईपीएफ पर ब्याज दर को 8.8 फीसद रखने का निर्णय किया था। लेकिन वित्त मंत्रालय ने इसकी अनदेखी करते हुए ब्याज दर को घटाकर 8.7 फीसद करने का एकपक्षीय व अलोकतांत्रिक निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से करोड़ों कर्मचारी प्रभावित होंगे। उन्होंने सवाल किया कि त्रिपक्षीय समिति के फैसले को कार्यपालिका कैसे बदल सकती है जबकि यह धन पूरी तरह से कर्मचारियों का है।

सेन ने आरोप लगाया कि सरकार कारोबार करने की सुविधा के नाम पर ईपीएफ को ही खत्म करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले पीएफ से धन निकालने के बारे में सरकार ने एक निर्णय किया था जिसे उसे भारी विरोध के चलते वापस लेना पड़ा था। उन्होंने कहा कि ईपीएफ की ब्याज दर घटाने के सरकार के निर्णय को स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभिन्न दलों के कई सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से खुद को संबद्ध किया।

शिवसेना के अनिल देसाई ने दिल्ली के राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में पिछले दिनों लगी आग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि फिक्की इमारत की छह मंजिलों में लगी आग से इस संग्रहालय में रखे कई मूल्यवान प्राणी अवशेष जलकर खाक हो गए। उन्होंने कहा कि आग से खाक होने वाले दुर्लभ अवशेषों में डायनोसॉर की एक हड्डी भी शामिल है। देसाई ने कहा कि यह देश का एकमात्र राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय है। उन्होंने कहा कि अन्य देशों की तरह हमें भी अपने संग्रहालयों की सुरक्षा विशेषकर आग से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए विशेष प्रबंध करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस अग्निकांड में संग्रहालय के निदेशक व संबंधित मंत्रालय की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीपीडब्लूडी और अन्य संबंधित एजंसियों को यह कड़ा निर्देश देना चाहिए कि ऐसे संग्रहालयों की सुरक्षा में अग्निशमन और अतिक्रमण रोकने के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं।

शून्यकाल में ही बीजद के दिलीप टिर्की ने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में रियो ओलंपिक में क्वालिफाई करने के लिए दो भारतीय एथलीटों द्वारा रिकार्ड बनाए जाने के बावजूद बिजली नहीं होने से उसे रिकार्ड नहीं कर पाने के कारण उन्हें ओलंपिक में जगह नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इसे एक अपराध करार देते हुए कहा कि हमारे एथलीटों द्वारा रिकार्ड बनाए जाने के बावजूद उनका ओलंपिक में क्वालिफाई न कर पाना बहुत ही दुखद है।

टिर्की ने कहा कि यह दोनों एथलीट इसलिए क्वालिफाई नहंी कर पाए क्योंकि उनकी दौड़ के समय को इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज नहीं किया जा सका। बिजली नहीं होने के कारण ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि स्टेडियम में पावर बैकअप मौजूद था लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

सपा के नरेश अग्रवाल ने मशहूर हस्तियों द्वारा किए जाने वाले विज्ञापनों में ग्राहकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी और सेवा में कमी का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि ऐसे मामलों में कंपनी के साथ साथ ब्रांड एम्बेस्डर के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज फिल्म, खेल और धर्म जैसे विभिन्न क्षेत्रों की मशहूर हस्तियां विभिन्न विज्ञापनों के लिए ब्रांड एम्बेस्डर का काम करती हैं।

उन्होंने मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक रियल एस्टेट कंपनी के लिए विज्ञापन किया। इस विज्ञापन को देखकर फ्लैट के लिए धन जमा कराने वाले बहुत से लोगों ने नोएडा में विरोध जताया था। अग्रवाल ने कहा कि ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई करने के पक्ष में संसद की एक समिति ने भी अपनी सिफारिश दी है। उन्होंने कहा कि संसदीय समिति की रिपोर्ट लागू की जाए।
कांगे्रस के संजय सिंह ने शून्यकाल में उत्तर प्रदेश की कुछ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने के बावजूद उन्हें जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि गड़रिया समूह की जितनी भी जातियां हैं उन्हें अनुसूचित जाति की श्रेणी में डाला जाना चाहिए। इसी पार्टी के आनंद भास्कर रापोलू ने दिल्ली में चल रही सम विषम योजना से संबंधित कोई मुद्दा उठाया। लेकिन उन्हीं की पार्टी के कुछ सदस्यों द्वारा मनोनीत सदस्य सुब्रह्मण्यम स्वामी की एक टिप्पणी को लेकर आसन के समक्ष आकर विरोध जताए जाने के कारण हंगामे में रापोलू की बात सुनी नहीं जा सकी।

शून्यकाल में ही झामुमो के संजीव कुमार ने झारखंड में विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण के कारण आदिवासियों, विशेष कर संथाल जनजाति को होने वाली कठिनाइयों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून का दुरूपयोग कर आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाई जानी चाहिए।

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