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देश में रह जाएंगी सिर्फ दो ही टेलिकॉम कंपनियां, एयरटेल के सुनील मित्तल बोले- एजीआर की पेमेंट से बढ़ा संकट

भारती एयरटेल के चेयरमैन ने कहा, 'टेलिकॉम सेक्टर पर पैदा हुए आर्थिक दबाव के चलते कारोबार दो ही कंपनियों के बीच सिमट सकता है। यदि तीसरी कंपनी के प्रमोटर बड़े पैमाने पर कैपिटल नहीं जुटा पाते हैं तो फिर मुकाबले में बने रहना मुश्किल होगा।'

sunil mittalएयरटेल के मुखिया सुनील मित्तल

एयरटेल के मुखिया सुनील मित्तल ने कहा है कि आने वाले दिनों में सिर्फ दो टेलिकॉम कंपनियों का ही अस्तित्व रह सकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट के चलते यह स्थिति पैदा हो सकती है और देश में सिर्फ दो टेलिकॉम कंपनियां रह जाएंगी। भारती एयरटेल के चेयरमैन ने कहा, ‘टेलिकॉम सेक्टर पर पैदा हुए आर्थिक दबाव के चलते कारोबार दो ही कंपनियों के बीच सिमट सकता है। यदि तीसरी कंपनी के प्रमोटर बड़े पैमाने पर कैपिटल नहीं जुटा पाते हैं तो फिर मुकाबले में बने रहना मुश्किल होगा। एयरटेल पर भी विपरीत असर पड़ा है। हमने राइट्स इश्यू एवं अन्य तरीकों से कंपनी में नई पूंजी लाने का काम किया है। तीसरी कंपनी को भी ऐसा ही कुछ करना होगा।’

भले ही सुनील मित्तल ने किसी कंपनी का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर वोडाफोन आइडिया की ओर था, जो गहरे आर्थिक संकट से जूझ रही है। सरकारी एजीआर बकाये को लेकर चिंता जताते हुए सुनील मित्तल ने कहा, ‘एजीआर पेमेंट बहुत अधिक है और इससे टेलिकॉम कंपनियां पर बोझ बढ़ गया है। कंपनियों को पेनल्टी और इंटरेस्ट बड़े पैमाने पर देना पड़ रहा है। इस बड़ी रकम ने इंडस्ट्री का पूरा कैश निकालने का काम किया है, जो 4जी और 5जी नेटवर्क पर खर्च किया जा सकता था।’ एयरटेल के मुखिया ने भले ही एजीआर की रकम को ज्यादा बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करेंगे।

सुनील मित्तल ने कहा कि एजीआर की रकम को चुकाने की समस्या नहीं है, लेकिन इसके लिए दिए जाने वाले समय को लेकर परेशानी है। बता दें कि एयरटेल पर कुल 43,980 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया है, जिसमें से कंपनी ने 18,004 करोड़ रुपये की रकम अदा कर दी है। अब कंपनी 25,976 करोड़ रुपये बकाया रकम चुकाने के लिए 15 साल का वक्त चाहती है। इसी तरह वोडाफोन आइडिया ने भी 50,400 करोड़ रुपये की रकम को चुकाने के लिए 15 साल का वक्त मांगा है। कंपनी पर कुल 58,254 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया था, जिसमें से उसने अब तक 7,854 करोड़ रुपये की रकम अदा कर दी है।

गौरतलब है कि एक तरफ रिलायंस जियो की लॉन्चिंग और दूसरी तरफ एजीआर बकाये ने परंपरागत टेलिकॉम कंपनियों की कमर ही तोड़ दी है। आर्थिक संकट से जूझ रही कंपनी आइडिया और वो़डाफोन ने विलय कर लिया था, लेकिन उसके बाद भी यह परेशानी कायम है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले वक्त में वोडाफोन आइडिया अपना कारोबार समेट सकती है। सुनील मित्तल ने अगले 5 से 6 महीने में एवरेज रेवेन्यू पर यूजर के बेहतर होने की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा होता है तो टेलिकॉम कंपनियों को मदद मिलेगी।

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