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बंद हो सकता है ऑनलाइन मार्केटिंग में छूट का खेल, राष्ट्रीय मसौदा तैयार

आनलाइन बाजार के बारे में प्रस्तावित राष्ट्रीय नीति के मसौदे के प्रावधान लागू हुए तो आॅनलाइन बाजार मंचों पर भारी छूट के दिन लद जाएंगे।

Author नई दिल्ली | August 1, 2018 4:14 PM
(Illustration: CR Sasikumar)

आनलाइन बाजार के बारे में प्रस्तावित राष्ट्रीय नीति के मसौदे के प्रावधान लागू हुए तो आॅनलाइन बाजार मंचों पर भारी छूट के दिन लद जाएंगे। मसौदे के अनुसार ई-वाणिज्य मंच चलाने वाली कंपनियां या उनके समूह की कोई कंपनी उस मंच के जरिए बेचे जाने वाले किसी उत्पद या सेवा की कीमत या बिक्री को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर प्रभावित करने का कोई काम नहीं कर सकेंगी। समझा जाता है कि इससे आॅनलाइन खरीदारी के लिए दी जाने वाली भारी छूटों के दौर पर लगभग पूर्णतया रोक लग सकेगी और कारोबार की दृष्टि से इसका फायदा छोटे दुकानदारों को हो सकता है। यह प्रस्ताव नीति के मसौदे का हिस्सा हैं जिसे सभी हितधारकों के बीच चर्चा के लिए रखा गया है। इसके अलावा मसौदे में ई-वाणिज्य कंपनियों को विभेदात्मक या कम कीमतों (खुदरा दुकानदारों के मुकाबले) पर उत्पादों की पेशकश करने के लिए पहले से एक तय कार्यक्रम की घोषणा करनी होगी।

ये सिफारिशें ई-वाणिज्य क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा-रोधी मुद्दों के प्रभावी समाधान की रणनीति का हिस्सा है। मसौदे के अनुसार, ‘‘ई-वाणिज्य मार्केटप्लेस पर सामान और सेवाओं की कीमतें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करने पर रोक रहेगी। यह रोक मार्केटप्लेस कंपनी और समूह की अन्य कंपनियों पर भी रहेगी।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘ग्राहकों को आर्किषत करने के लिए ई-वाणिज्य कंपनियों के लिए एक ‘पटाक्षेप का नियम’ बनाया गया है। इसके तहत कंपनियां यदि किसी उत्पाद को कम कीमत पर बेचना चाहती हैं तो उन्हें उस उत्पाद पर भारी छूट की अधिकतम तय अवधि बतानी होगी।’’ वहीं इस नीति में ई-वाणिज्य कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा भी तय किए जाने का प्रस्ताव है।

इसी तरह यदि कोई ई-वाणिज्य कंपनी अपना खुद का स्टाक (माल गोदाम) बना कर उसके आधार पर ग्राहकों को खुदरा बेचती है तो उनमें 49% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया जा सकेगा। अभी इस तरह के ई-वाणिज्य कारोबार में विदेशी निवेश पर रोक है और केवल खुदरा मार्केटप्लेस कारोबारी मॉडल में ही विदेशी निवेश की अनुमति है। नीति में भारत में निर्मित उत्पादों की बिक्री के प्रोत्साहन की भी बात कही गई है। इसके तहत भारतीयों के स्वामित्व वाली ई-रिटेल कंपनी को शतप्रतिशत भारत में बने उत्पादों का अपना खुद का सीमित मात्रा में स्टाक बना कर उसकी बिक्री की अनुमति होगी।

आरंभिक मसौदे में घरेलू कारोबार और अंतरराष्ट्रीय बातचीत के लिए ई-वाणिज्य की एक साझा परिभाषा तय करने की भी सिफारिश की गई है। अभी ऐसी कोई परिभाषा मौजूद नहीं है। अभी आयकर विभाग, विश्व व्यापार संगठन, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन और अंकटाड की अपनी-अपनी परिभाषाएं हैं। इस मसौदे में ई-रिटेल मंचों पर रूपे का प्रयोग बढ़ाने के उपाय करने , डिजिटल तरीके से उधार देने ओर ब्लाक चेन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की भी भी सिफारिश की गयी है।

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