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मुकेश अंबानी की मुश्किलें बढ़ा रही Flipkart-Amazon, यहां राहत के लिए की अपील

ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की वजह से रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच की डील अटकी हुई है। वहीं, अडानी पोर्ट्स की लॉजिस्टिक्स लिमिटेड और ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के बीच एक डील हुई है।

मुकेश अंबानी (Photo-PTI )

वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट और अमेजन, दोनों कंपनियां मुकेश अंबानी के रिलायंस रिटेल के लिए अलग-अलग तरह से चुनौती पेश कर रही हैं।

अमेजन कैसे दे रही चुनौती: अमेरिका की ई कॉमर्स कंपनी अमेजन की वजह से रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच की डील अटकी हुई है। किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप के साथ रिलायंस ने ये डील पिछले साल की थी। 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की इस डील के जरिए रिलायंस रिटेल मार्केट में दबदबा बढ़ाने में जुटी है लेकिन अमेजन ने मामले को कोर्ट में घसीट दिया है। अमेजन, फ्यूचर समूह में खुद की हिस्सेदारी का दावा करते हुए डील को अवैध बता रही है।

फ्लिपकार्ट कैसे दे रही चुनौती: हाल ही में अडानी पोर्ट्स की लॉजिस्टिक्स लिमिटेड और ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के बीच एक डील हुई है। इसके तहत अडानी लॉजिस्टिक्स मुंबई में अपने आगामी लॉजिस्टिक्स हब में करीब 5.34 लाख वर्ग फुट वाला गोदाम बनाएगी। इस गोदाम को पश्चिमी भारत में ई-कॉमर्स सेवाएं देने के लिए फ्लिपकार्ट को लीज पर दिया जाएगा। यही नहीं, डेटा सेंटर स्‍थापित करने की योजना पर भी अडानी ग्रुप काम कर रहा है। इस कदम से मुकेश अंबानी के जियो मार्ट की चुनौती बढ़ेगी।

Flipkart-Amazon की नई मुश्किल: दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रतिस्पर्धा कानूनों के प्रावधानों के कथित उल्लंघन के भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के जांच आदेश को रद्द करने की अमेजन और फ्लिपकार्ट की याचिका खारिज कर दी थी।

सीसीआई ने प्रतिस्पर्धा कानूनों के प्रावधानों के कथित उल्लंघन को लेकर दोनों प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों के जांच के निर्देश दिए थे। अब इस मामले में फ्लिपकार्ट और अमेजन ने डिविजन बेंच के समक्ष अपील दायर की है। (ये पढ़ें-मुकेश अंबानी से ज्यादा है इन दो भाइयों की सैलरी, रिलायंस में मिली है बड़ी जिम्मेदारी)

आपको बता दें कि सीसीआई ने जनवरी 2020 में भारी छूट देने और कुछ कंपनियों के साथ तरजीही गठजोड़ कर सामान बेचने समेत अन्य कथित अनैतिक व्यापारिक गतिविधियों को अपनाने के लिए फ्लिपकार्ट और अमेजन के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इस आदेश में कर्नाटक उच्च न्यायालय की एकल सदस्यीय पीठ के समक्ष चुनौती दी गई।

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