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चीनी सामान के खिलाफ देश में माहौल, पर एक तिहाई भारतीय ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार नहीं: सर्वे

सर्वे में 90 पर्सेंट भारतीयों ने चीन में बने सामान के बहिष्कार की बात कही, लेकिन 67 फीसदी लोगों ने ही यह माना कि वे इसके लिए अधिक कीमत चुकाने को तैयार हैं।

boycott china productsगैर-चीनी उत्पादों के लिए ज्यादा चुकाने को तैयार नहीं एक तिहाई भारतीय

सीमा पर चीन से तनाव के बाद देश में चीनी कंपनियों के खिलाफ माहौल बना हुआ है, लेकिन अब भी देश में एक तिहाई ऐसे लोग हैं, जो गैर-चीनी उत्पादों के लिए अधिक कीमत नहीं देना चाहते। इससे स्पष्ट है कि देश का बड़ा वर्ग चीनी उत्पादों के बहिष्कार के नाम पर अधिक कीमत अदा नहीं करना चाहता। इंडिया टुडे की ओर से किए गए ‘मूड ऑफ द नेशन 2020’ सर्वे में यह बात सामने आई है। सर्वे में 90 पर्सेंट भारतीयों ने चीन में बने सामान के बहिष्कार की बात कही, लेकिन 67 फीसदी लोगों ने ही यह माना कि वे इसके लिए अधिक कीमत चुकाने को तैयार हैं। 12,021 लोगों पर किए गए सर्वे में से 30 फीसदी लोगों ने कहा कि वह गैर-चीनी उत्पादों की खरीद के लिए ज्यादा रकम चुकाने को तैयार नहीं हैं।

सर्वे में शामिल 90 फीसदी लोगों ने कहा कि चीनी उत्पादों पर भारत में बैन लगना चाहिए। 90 फीसदी से ज्यादा लोगों ने चीन के 59 ऐप्स पर केंद्र सरकार की ओर से बैन लगाए जाने के फैसले का समर्थन किया। इसके अलावा 7 फीसदी लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने चीनी ऐप्स पर बैन का विरोध किया। इंडिया टुडे की ओर से यह सर्वे देश के 19 राज्यों की 194 विधानसभा सीटों और 97 संसदीय सीटों में किया गया। राज्यों के अनुसार बात करें तो सर्वे में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाबस ओडिशा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया।

बता दें कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीन और भारतीय सैनिकों के बीच झड़प के बाद से ही देश में चीनी उत्पादों के खिलाफ माहौल बना हुआ है। इसी बीच केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों के 59 ऐप्स पर बैन लगाने का फैसला लिया है। इसके अलावा रेलवे, हाईवे समेत कई सरकारी ठेकों से भी चीनी कंपनियों को बाहर रखने के लिए फैसले लिए गए हैं। हालांकि अब भी स्मार्टफोन की बिक्री के मामले में चीनी कंपनी शाओमी टॉप पर बनी हुई है। जून तिमाही में शाओमी की स्मार्टफोन मार्केट में 29 फीसदी हिस्सेदारी रही है।

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