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पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने कहा था, मेरे पास जैक मा है, चीनी ऐप्स पर बैन के बाद बदले सुर

अलीबाबा और उसकी कई अन्य कंपनियों की पेटीएम, पेटीएम मॉल, पेटीएम मनी और कई अन्य यूनिट्स में 25 फीसदी तक की हिस्सेदारी है। विजय शेखर शर्मा की यह टिप्पणी उनके 2015 के एक बयान के एकदम उलट है।

vijay shekhar sharmaचीनी ऐप्स पर बैन के बाद बदले पेटीएम के फाउंडर के सुर

चीनी कंपनियों के 59 ऐप्स पर बैन लगाने के केंद्र सरकार के फैसले की पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने सराहना की है। शर्मा ने कहा कि सरकार ने ऐसा करके साहसी कदम उठाया है और यह फैसला देशहित में है। पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन 97 कॉम्युनिकेशंस में भी चीन की दिग्गज ऑनलाइन रिटेल कंपनी अलीबाबा ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। यही नहीं चीन की कई अन्य कंपनियों की भी पेटीएम में हिस्सेदारी है। शर्मा ने ट्वीट किया, ‘राष्ट्रहित में साहसी फैसला लिया गया है। ऐप्स के मार्केट में आत्मनिर्भर भारत की ओर यह एक कदम है। यह मौका है, जब भारतीय आंत्रप्रेन्योर्स को आगे आना चाहिए और भारतीयों के लिए भारतीयों के द्वारा अच्छे ऐप्स तैयार करने चाहिए।’

अलीबाबा और उसकी कई अन्य कंपनियों की पेटीएम, पेटीएम मॉल, पेटीएम मनी और कई अन्य यूनिट्स में 25 फीसदी तक की हिस्सेदारी है। विजय शेखर शर्मा की यह टिप्पणी उनके 2015 के एक बयान के एकदम उलट है। तब उन्होंने हिंदी फिल्म के एक डायलॉग का हवाला देते हुए कहा था कि मेरे पास मा है… जैक मा। ऐसे में विजय शेखर शर्मा का यह बयान काफी विरोधाभासी नजर आता है। बता दें कि 2016 में नोटबंदी के बाद से पेटीएम को देश में काफी चर्चा मिली है और ऑनलाइन पेमेंट के सेक्टर में एक लोकप्रिय ऐप के तौर पर अपना स्थान बनाया है।

पेटीएम के अलावा कई अन्य स्टार्टअप्स में भी अलीबाबा, टेंसेंट समेत कई चीनी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। ऑनलाइन ग्रॉसर बिगबास्केट, ईकॉमर्स फर्म स्नैपडील, फूड डिलिवरी फर्म जोमैटो और लॉजिस्टिक्स फर्म Xpressbees तक में अलीबाबा ने बड़ा इन्वेस्टमेंट किया है। भारत के स्टार्टअप सिस्टम में चीनी दखल का इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्विगी, Byju से लेकर ओला तक लगभग हर यूनिकॉर्न कंपनी में चीन ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है।

गौरतलब है कि चीनी ऐप्स पर बैन को लेकर चीन सरकार ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इससे भविष्य में भारत में होने वाला निवेश प्रभावित होगा। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन समेत किसी भी अंतरराष्ट्रीय निवेशक के कानूनी हितों का ख्याल रखना भारत सरकार की जिम्मेदारी है।

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