Ola founder bhavish aggarwal success story: भारत में आज कैब यानी राइडशेयरिंग के मामले में बड़ा नाम बन चुकी ओला कंपनी की शुरुआत बेहद दिलचस्प है। कंपनी के सह-संस्थापक भाविश अग्रवाल के मुताबिक जब उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ ओला की शुरुआत करने की बात कही तो पैरेंट्स ने चौंकते हुए कहा था कि ट्र्रैवल एजेंसी क्यों नहीं खोल लेते? डॉक्टर माता-पिता की संतान भाविश अग्रवाल ने एक कार्यक्रम में बताया, ‘आज भले ही इंटरनेट के साथ स्टार्टअप इंडस्ट्री मेच्योर हो गई है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। 2010 में यह शुरुआत थी। खासतौर पर लुधियाना में रहने वाले किसी परिवार के लड़के के लिए यह सोच से भी परे था कि वह किसी नौकरी की बजाय कोई कंपनी शुरू करे।’

भाविश अग्रवाल ने कहा कि वह बेहद दिलचस्प दौर था और मेरे पैरेंट्स ने मेरी इच्छा का सम्मान रखा। उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता को भी मेरे इस फैसले को लेकर चिंता थी, लेकिन यह अकसर मिडिल क्लास लोगों के साथ होता है। अग्रवाल ने 2011 में मुंबई में कंपनी की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में आज की तरह स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग का माहौल नहीं था और कोई भी निवेशक 24 साल के लड़के के टैक्स कंपनी चलाने के प्लान में पैसे नहीं लगाना चाहता था।

सॉफ्टबैंक जैसे दिग्गज संस्थान की फंडिंग हासिल करने वाले ओला की शुरुआत को लेकर एक और किस्सा भाविश अग्रवाल ने साझा किया। उन्होंने बताया कि आईआईटी से पढ़ाई के बाद वह माइक्रोसॉफ्ट के साथ काम कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने एक कैब ली, जिसने बहुत ज्यादा पैसों की मांग की और बीच रास्ते में ही उतार दिया। इस घटना के बाद ही उनके दिमाग में राइड शेयरिंग कंपनी स्थापित करने का विचार आया।

वह बताते हैं कि एकबार बांदीपुर से बैंगलूरु जाने के लिए उन्होंने एक कार किराये पर ली थी लेकिन मैसूर में ड्राइवर ज्यादा किराये की मांग पर अड़ गया था। इसके बाद उन्हें और उनके दोस्तों को बाकी सफर बस से करना पड़ा था। गौरतलब है कि ओला कंपनी के पास फिलहाल 10 अरब डॉलर की पूंजी है। फिलहाल यह कंपनी भारत से बाहर ऑस्ट्रेलिया, युनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड में भी कारोबार कर रही है।