Oil Price Surge: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक कच्चे तेल बाजार में हलचल मचा दी है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, क्योंकि निवेशकों को डर है कि पश्चिम एशिया से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इस चिंता की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग रूट्स में से एक है…
100 डॉलर प्रति बैरल के करीब ब्रेंट ऑयल
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0212 GMT तक 1.4% बढ़कर 99.33 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड (WTI) भी 1.4% बढ़कर 94.34 डॉलर प्रति बैरल हो गया। लिखते समय (9:16 am IST), ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स रियल-टाइम ट्रैकर पर ब्रेंट 99.337 डॉलर पर था।
लगातार बढ़ती तेल की कीमतें बताती हैं कि वेस्ट एशिया झगड़े के पक्के हल की उम्मीदें धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ US और इज़राइल के जॉइंट मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने के साथ, यह जंग जल्द ही अपने सातवें महीने में पहुंच जाएगी और जैसा कि पिछले कुछ दिनों में देखा गया है, यह और भी तेज होती जा रही है।
कीमतों में यह ताजा बढ़ोतरी यमन में ईरान के सपोर्ट वाले ग्रुप हूथियों के कई सऊदी शहरों पर हमले करने के बाद हुई है, जिससे US का एक साथी भी बढ़ते झगड़े में घसीट लिया गया है।
यह भी पढ़ें: Bank Holiday News: दूसरा शनिवार, गणेश चतुर्थी और संवत्सरी… 11-15 सितंबर के बीच कब-कहां-किस वजह से बंद रहेंगे बैंक?
एक्सपर्ट्स की चेतावनी
ING के एनालिस्ट्स ने एक नए नोट में बताया कि हाल के डेवलपमेंट्स ने इस बात को और पक्का कर दिया है कि US और ईरान के बीच शांति बातचीत फिर से शुरू होना इस समय बहुत दूर की बात लगती है। उन्होंने आगे कहा, “इस बीच, मार्केट में बड़े रिस्क प्रीमियम पर कीमतें तय होने की संभावना है,”
रायटर्स के मुताबिक, इसी तरह, OCBC के एनालिस्ट्स ने अपने नोट में कहा, “ईरान के सऊदी एनर्जी फैसिलिटीज़ पर हमले और उसके बाद पाँच ईरानी टैंकरों को नष्ट करने से तेल सप्लाई में एक और लंबे समय तक रुकावट की चिंता बढ़ गई है,”
इस बीच, गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल कमोडिटी रिसर्च के को-हेड, डैन स्ट्रुइवेन ने भी शिपिंग पर लगातार हमलों के बीच तेल की कीमतों के 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की रिस्की संभावना का इशारा दिया। CNBC के ‘स्क्वॉक बॉक्स एशिया’ से बात करते हुए, स्ट्रुइवेन ने कीमतों में ज़बरदस्त उछाल की संभावना को “निश्चित रूप से मुमकिन” बताया।
यह बताते हुए कि पश्चिम एशिया में बढ़ती दुश्मनी एक ऐसे सिनेरियो का भी संकेत दे रही है जिसमें अगले कुछ महीनों में एक्सपोर्ट ठीक नहीं हो सकता है, उन्होंने CNBC को बताया, “पिछले कुछ दिनों के डेवलपमेंट से पता चलता है कि वह दूसरा अपसाइड प्राइस सिनेरियो, जहाँ आने वाले कुछ महीनों में एक्सपोर्ट असल में स्थिर हो जाता है, और जहाँ ब्रेंट 120 डॉलर से ज़्यादा हो जाता है, उस सिनेरियो की संभावना निश्चित रूप से बढ़ रही है क्योंकि हम शिपिंग हमलों में तेज़ी और बढ़ोतरी देख रहे हैं।”
यह भी पढ़ें: NSE IPO: करीब 30000 करोड़ रुपये का मेगा IPO, लेकिन एक भी रुपया एक्सचेंज को क्यों नहीं मिलेगा?
ताजा घटनाक्रम जिससे कीमतों में तेजी आई
हालांकि US और ईरान के बीच मिलिट्री एक्शन लगभग एक महीने के लिए काफी हद तक रुक गया था, लेकिन US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के तेहरान पर “इकोनॉमिक प्रेशर” डालने के फैसले के बाद अगस्त के आखिर में हमले फिर से शुरू हो गए, साथ ही इसके साथी देशों पर भी बैन लगा दिए गए
मंगलवार को खास तौर पर US और ईरान के बीच एक जैसा बदला लेने का माहौल बना रहा, क्योंकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अपने हमले तेज कर दिए। सऊदी अरब के दक्षिण में चार शहरों पर ईरान के सपोर्ट वाले हूतियों के हमलों में 73 लोग घायल हो गए, जबकि इलाके में तेल प्लांट में आग लगा दी गई।
इसके बाद, US मिलिट्री के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने घोषणा की कि उसने उसी दिन ईरान के पांच क्रूड वेसल को नष्ट कर दिया और हमलों का एक वीडियो पोस्ट किया। CENTCOM ने इसे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा कुछ दिन पहले दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से US नेवी के एक वॉरशिप को निशाना बनाने का जवाब बताया।
तेहरान के खिलाफ एक और चेतावनी देते हुए, US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कोलंबिया के दौरे के दौरान रिपोर्टर्स से कहा कि जब भी ईरान US नेवी के जहाजों पर हमला करने की कोशिश करेगा, तो उसे टैंकर खोने पड़ेंगे।
US ईरान पर इकोनॉमिक दबाव बनाना जारी रखे हुए है
इस बीच, मंगलवार को US ने ट्रंप के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के हिस्से के तौर पर देश के एविएशन सेक्टर और कंपनियों को टारगेट करने के लिए ईरान से जुड़े 36 बैन भी लगाए। अगस्त के आखिर में, व्हाइट हाउस ने ईरान के खिलाफ POTUS के इकोनॉमिक ऑपरेशन की डिटेल्स ऑफिशियली जारी कीं, और इसे “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान को चलाने वाली हर बची हुई इकोनॉमिक लाइफलाइन को खत्म करने का एक अनोखा कैंपेन” बताया।
यह भी पढ़ें: CAS के बाद डेरिवेटिव सेटलमेंट पर SEBI की समीक्षा, क्या बदलेंगे नियम?
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट और इंडस्ट्री की आपत्तियों के बीच भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पिछले हफ्ते संकेत दिया कि वह डेरिवेटिव्स सेगमेंट के सेटलमेंट के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव ला सकता है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
[Disclaimer: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या क्रिप्टोकरेंसी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। इस लेख में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श जरूर करें। निवेश से होने वाले किसी भी लाभ या हानि के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।]
