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‘भ्रष्टाचार-कालाधन के खिलाफ़ कार्रवाई में मददगार नोटबंदी’

इसने भारत पर जारी अपनी रपट में कहा है कि ‘नोटबंदी लागू करने की कुछ संक्रमणकालिक एवं अल्पकालिक लागतें लगी हैं पर इसके दीर्घकालिक लाभ होंगे।’

Author नई दिल्ली | February 28, 2017 11:00 PM
बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा में 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बदलवाने के लिए कतार में खड़े लोग। (PTI Photo/11 Nov, 2016)

बहुपक्षीय आर्थिक शोध एवं परामर्श संगठन ओईसीडी ने मंगलवार (28 फरवरी) को कहा कि नोटबंदी से भारत सरकार द्वारा भष्ट्राचार, कालेधन और करापवंचन के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलेगी और इसके दीर्घकालिक फायदे होंगे। ऑर्गनाइजेशन ऑफ इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) का मुख्यालय पेरिस में है। इसने भारत पर मंगलवार को यहां जारी अपनी रपट ‘इकोनॉमिक सर्वे ऑफ इंडिया’ में कहा है कि ‘नोटबंदी लागू करने की कुछ संक्रमणकालिक एवं अल्पकालिक लागतें लगी हैं पर इसके दीर्घकालिक लाभ होंगे।’ थोड़े समय के लिए नकदी की कमी और भुनाए नहीं जा सके जाली मुद्रा तथा अवैध धन के कारण संपत्ति के नुकसान से निजी खपत पर असर जरूर पड़ा है। लेकिन कम नकदी वाली तथा औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर प्रगति से अर्थव्यवस्था में वित्त की आपूर्ति बढ़ेगी, अधिक सुलभ होगा तथा कर अनुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा।

‘नोटबंदी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक परिदृश्य में एक चमकता स्थान बनी रहेगी’

भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है और नोटबंदी के कारण कुछ समय की नरमी के बावजूद वह वैश्विक परिदृश्य में एक आकर्षक चमकता स्थान बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही। आईएमएफ ने भारत पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है और उसके बाद के वर्ष में यह 7.2 प्रतिशत रह सकती है। आईएमएफ के भारत मिशन प्रमुख पॉल केशिन ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है और वैश्विक परिदृश्य में यह एक चमकता हुआ आकर्षक स्थान बनी रहेगी।’ केशिन ने कहा कि वर्ष 2014 के आखिरी महीनों में विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम घटकर आधे होने के बाद से भारत में आर्थिक गतिविधियां तेज होने लगीं, उसके चालू खाता और वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ और मुद्रास्फीति में भी गिरावट आई। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र में सरकारी घाटे पर अंकुश, कर्ज पर नियंत्रण के जरिये वित्तीय मोर्चे पर लगातार सुदृढ़ीकरण करने तथा मुद्रास्फीति कम करने के मौद्रिक नीति उपायों से देश के वृहदआर्थिक स्थायित्व को मजबूती देने में मदद मिली है।

केशिन ने इस बात पर भी गौर किया कि भारत सरकार ने महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। इससे मजबूत और सतत् आर्थिक वृद्धि में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के प्रस्तावित क्रियान्वयन से निकट भविष्य में भारत की आर्थिक वृद्धि दर को आठ प्रतिशत से ऊपर पहुंचाने में मदद मिलेगी। जीएसटी क्रियान्वयन से भारत में राज्यों के बीच सामान और सेवाओं की आवाजाही और उत्पादन क्षमता बेहतर होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसमें संतोष करके बैठ जाने की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने माना कि नोटबंदी की वजह से नकदी की भारी तंगी के चलते आर्थिक गतिविधियां गड़बड़ाई हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इस दौरान भुगतान समस्याओं को दूर करने के लिये कई उपाय किये। कुछ समय के लिये पुराने नोटों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई। ईंधन और कृषि कार्यों के लिये पुरानी मुद्रा के इस्तेमाल की अनुमति देकर नोटबंदी के नकारात्मक प्रभाव को कम करने का प्रयास किया गया। केशिन ने कहा, ‘इसलिये हमें लगता है कि आर्थिक नरमी सीमित दायरे में रहेगी और लंबी नहीं खिंचेगी। देश का वित्तीय तंत्र इससे अछूता रहेगा। हॉ, बैंकों के कर्ज भुगतान पर ध्यान देना होगा। विशेषतौर से बैंकों की गैर-निष्पादित राशि (एनपीए) के उच्चस्तर को देखते हुये इस पर गौर करना जरूरी है।’

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