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जल्द पटरी पर नहीं आ रही भारतीय अर्थव्यवस्था! OECD का आकलन- 5.9% रहेगी इकोनॉमी की ग्रोथ रेट

ओईसीडी ने अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, विश्लेषण और पूर्वानुमान में कहा कि दुनिया के कई उभरते बाजारों वाली अर्थव्यवस्था में बढ़ोती अनुमान से कम रहने की संभावना है।

भारत उन सात देशों में शामिल है जिनकी अनुमानित विकास दर में कटौती की गई है। (फाइल फोटो)

आर्थिक सुस्ती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर आती नहीं दिख रही है। ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर में 1.3 फीसदी की कमी का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। ओईसीडी के अनुसार साल 2019-20 में भारत की विकास दर 5.9 फीसदी रहने का अनुमान है।

वहीं अगले वित्त वर्ष के लिए संगठन की तरफ से 6.3 फीसदी की दर से जीडीपी में बढ़ोतरी का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। यह पूर्वानुमान भी पहले की तुलना में 1.1 फीसदी कम है। पेरिस के इस पॉलिसी फोरम का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर के कारण चीन का आर्थिक वृद्धि एक दशक में सबसे निचले स्तर पर होगी।

ओईसीडी ने बृहस्पतिवार को जारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, विश्लेषण और पूर्वानुमान में कहा कि दुनिया के कई उभरते बाजारों वाली अर्थव्यवस्था में बढ़ोती अनुमान से कम रहने की संभावना है। इसमें भारत, मेक्सिको और अन्य निर्यात करने वाले देश शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2019-20 वास्तव में 5.9 फीसदी की दर से विकास करती है तो यह साल 2013-14 की तुलना में कम होगी।

यूपीए 2 के कार्यकाल वाले इस साल को नीतिगत पंगुता वाला साल कहा गया था। इसके साथ ही भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश का तमगा भी खो सकता है। इसकी वजह है कि चीन की साल 2019-20 के लिए अनुमानित विकास दर 6.1 फीसदी है।

भारत उन सात देशों में शामिल है जिनकी अनुमानित विकास दर में कटौती की गई है। अन्य देश जिनकी अनुमानित विकास दर में कटौती की गई है उनमें अर्जेंटीना, ब्राजील, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं। ओईसीडी की तरफ से भारत की अनुमानित विकास दर में कटौती हाल के जारी आधिकारिक आंकड़ों के बाद की गई है।

आधिकारिक आंकड़ों में सामने आया था कि साल 2019-20 की पहली तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर महज 5 फीसदी रही थी। यह पिछले 6 साल में सबसे कम है। हालिया तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर में आश्चर्यजनक रूप से कमी देखने को मिली है।

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