NSE IPO: कई वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) शेयर बाजार में लिस्ट होने के करीब है। यह प्रस्तावित आईपीओ भारत के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू में से एक हो सकता है।
मार्केट के अनुमानों के मुताबिक, इसका संभावित साइज़ लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। लेकिन एक दिलचस्प बात है। आईपीओ से जुटाया गया पैसा खुद एनएसई को नहीं मिलेगा।
कैसे काम करेगा यह इश्यू?
एनएसई आईपीओ एक ‘ऑफर फॉर सेल’ है, कोई नया इश्यू नहीं, इसका मतलब है कि एनएसई आईपीओ के लिए नए शेयर नहीं बना रहा है। इसके बजाय, इसके कुछ मौजूदा इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
नई पूंजी नहीं जुटा रहा है एनएसई
मान लीजिए कि किसी कंपनी के पास 100 शेयर हैं। एक मौजूदा शेयरहोल्डर के पास उनमें से 10 शेयर हैं और वह आईपीओ के जरिए पब्लिक को पांच शेयर बेचने का फैसला करता है। कंपनी को उस बिक्री से पैसा नहीं मिलता है। शेयरहोल्डर को मिलता है। मोटे तौर पर एनएसई के साथ भी यही हो रहा है।
चूंकि प्रस्तावित इश्यू पूरी तरह से OFS है, इसलिए बेचे जा रहे शेयर पहले से ही मौजूद हैं। इसमें कोई नया इश्यू हिस्सा नहीं है। इसलिए, भले ही आईपीओ से आखिरकार 30,000 करोड़ रुपये जुट जाएं, लेकिन एक्सचेंज को खुद वह पैसा नहीं मिलेगा।
एनएसई क्यों हो रहा है लिस्ट?
आईपीओ से एनएसई को पब्लिक मार्केट वैल्यूएशन मिलेगा। इसके अलावा, इसके शेयर स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए, यह अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचने का एक जरिया देता है।
पैसे का क्या होता है?
OFS से मिलने वाला पैसा उन शेयरहोल्डर्स को जाएगा जो अपने एनएसई शेयर बेच रहे हैं, जिसमें लागू खर्च और टैक्स शामिल होंगे। एनएसई को आईपीओ से मिलने वाला पैसा नहीं मिलता है।
यही वह मुख्य बात है जिसे इन्वेस्टर्स को समझने की जरूरत है। एनएसई का आईपीओ देश के टॉप 5 बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। आईपीओ का फाइनल साइज, वैल्यूएशन, प्राइस बैंड और दूसरी जानकारी तभी पता चलेगी जब एनएसई आईपीओ की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करेगा।
हालांकि, अनुमान है कि यह भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा और इसका साइज लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है।
अगर आईपीओ का साइज सच में इतना बड़ा होता है, तो यह हाल के सालों में भारत के कुछ सबसे बड़े पब्लिक ऑफरिंग्स से भी बड़ा होगा।
तुलना के लिए, Hyundai Motor India ने अक्टूबर 2024 में अपने आईपीओ के जरिए लगभग 27,859 करोड़ रुपये जुटाए थे। 2022 में LIC के आईपीओ से लगभग 20,557 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।इस वजह से एनएसई का संभावित आईपीओ सबकी नजर में है।
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किसी कंपनी को जब नया प्लांट लगाना हो, कारोबार बढ़ाना हो, तो उसे बड़ी रकम की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आमतौर पर लोगों को लगता है कि कंपनियां बैंक से लोन लेती होंगी। लेकिन हकीकत यह है कि कई बड़ी कंपनियां बैंक से कर्ज लेने के बजाय बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं।
आखिर ऐसा क्यों होता है? बॉन्ड मार्केट क्या है, यह कैसे काम करता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं…
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