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पॉलिसी पूर्व बीमारी होने पर भी नहीं रोक सकते बीमा राशि, NCDRC ने रिलायंस इंश्योरेंस को दिया झटका

आयोग ने पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुये कहा कि बीमित व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है, इसे साबित करने का दायित्व बीमा कंपनी का है। आयोग ने कहा कि डायबिटीज, जीवनशैली की बीमारी है और समस्त बीमे के दावे को केवल इसी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

Author नई दिल्ली | Updated: June 6, 2019 7:53 PM
Insurance, Insurance Claim, Insurance Amount, Disease, NCDRC, Shock, Reliance Insurance, Business News, National News, India News, Jansatta News, Hindi Newsराष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग का कार्यालय। (फाइल फोटोः NCDRC)

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग (एनसीडीआरसी) ने एक निर्णय में कहा है कि किसी बीमे के दावे को केवल इस पूर्वानुमान के आधार पर नहीं ठुकराया जा सकता कि व्यक्ति पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित रहा होगा। उपभोक्ता मामलों के निपटारे के सर्वोच्च निकाय एनसीडीआरसी ने यहां तक कहा कि अगर कोई बीमित आदमी किसी बीमारी से पीड़ित है और उसे इसके बारे में पता नहीं है या उसने इसके लिए कोई दवाई नहीं ली है तो भी बीमा करने वाली कंपनी उसके दावे से इन्कार नहीं कर सकती।

आयोग ने यह संज्ञान रिलांयस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर पुर्निवचार याचिका के निपटारे के दौरान लिया। यह याचिका महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी। राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता मंच के निर्णय को बरकरार रखा था।

हालिया फैसले में डायबिटिक कीटोएसिडोसिस बीमारी की वजह से हुई मौत के मामले में बीमा पॉलिसी लेने वाली महिला के पति को 1,12,500 रूपए देने का फैसला दिया गया था। जिला उपभोक्ता अदालत ने मानसिक और शारीरिक यंत्रणा के मुआवजे के तौर पर पांच हजार रुपए और मुकदमे के खर्च के मुआवजे के तौर पर तीन हजार रुपए देने का आदेश दिया था।

आयोग ने पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा कि बीमित व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है, इसे साबित करने का दायित्व बीमा कंपनी का है। आयोग बोला कि डायबिटीज, जीवनशैली की बीमारी है और समस्त बीमे के दावे को केवल इसी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। बता दें कि याची की पत्नी रेखा हल्दार की डायबिटिज कीटोएसीडोसिस की वजह से मौत हो गई थी।

उन्होंने रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से 12 जुलाई 2010 को पॉलिसी योजना ली थी। हालांकि, बीमा कंपनी ने उनका दावा इस आधार पर अस्वीकार कर दिया था कि उन्हें पहले से ही बीमारी थी। हल्दार के पति की याचिका पर महाराष्ट्र के जलगांव की अदालत ने कंपनी को उन्हें 1.12 लाख रूपये देने का आदेश सुनाया था।

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