अगर आप सोने में निवेश करते हैं तो फिर यह खबर आपके काम की है। बता दें कि गोल्ड में निवेश करने वाले लोगों के लिए एक नया विकल्प आया है, जिसे ‘इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स’ (EGR) कहा जाता है। यह मौजूदा तरीकों के साथ-साथ एक और विकल्प देता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स को लॉन्च करने की घोषणा की है।
इन्हें NSE के EGR सेगमेंट में शेयरों और बॉन्ड्स की तरह ही खरीदा-बेचा जा सकता है। ये EGRs असल सोने (physical gold) पर आधारित होते हैं, जिन्हें किसी भी समय भुनाया जा सकता है।
क्या है इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट?
आसान शब्दों में कहें तो, EGR सोने के मालिकाना हक का एक डिजिटल सबूत है। NSE के EGR प्लेटफॉर्म के आने के साथ ही, ‘गोल्ड एक्सचेंज’ का सपना आखिरकार सच हो गया है। SEBI ने सबसे पहले 2022 में इस गोल्ड एक्सचेंज की घोषणा की थी।
गोल्ड एक्सचेंज भारत में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) को खरीदने और बेचने के लिए एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है। स्टॉक एक्सचेंज EGR की ट्रेडिंग के लिए या तो एक नया एक्सचेंज बना सकते हैं, या फिर अपने मौजूदा एक्सचेंज के ढांचे में ही EGR को लॉन्च कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए एक अलग सेगमेंट बनाना होगा। NSE पर, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स की ट्रेडिंग EGR सेगमेंट में की जाएगी।
क्या है निवेशकों के लिए नया?
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट रखने वाले निवेशक को सोने के मालिकाना हक में हिस्सेदारी मिलेगी। सोना एक सुरक्षित वॉल्ट (तिजोरी) में सुरक्षित रखा जाता है, आपके मालिकाना हक की जानकारी आपके डीमैट खाते में दर्ज होती है और जब आप इसे भुनाना चाहें, तो आप इसे असल सोने में बदल सकते हैं।
EGRs का एक और बड़ा फायदा ‘एक देश, एक कीमत’ का सिद्धांत है। इससे सोने की ट्रेडिंग करना और भी आसान हो जाता है। EGR सभी खुदरा निवेशकों, जौहरियों, बुलियन व्यापारियों और यहाँ तक कि रिफाइनरियों के लिए भी उपलब्ध हैं। इन्हें एक्सचेंज पर आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है।
कैसे करें EGR में निवेश?
NSE के EGR सेगमेंट में शुद्धता के दो विकल्प (‘EGR – 999 शुद्धता’ और ‘EGR – 995 शुद्धता’) उपलब्ध हैं। आप छोटी मात्रा से भी शुरुआत कर सकते हैं दोनों ही विकल्पों में सोने की मात्रा 100 मिलीग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक हो सकती है। इस तरह, यह अलग-अलग तरह के निवेशकों के लिए सुलभ है।
तकनीकी रूप से, EGR एक इलेक्ट्रॉनिक रसीद है, जिसे ‘वॉल्ट मैनेजर’ द्वारा जारी किया जाता है। यह रसीद उस सोने के बदले दी जाती है, जिसे निवेशक ने उनके पास जमा किया होता है। हर EGR के पीछे असल सोना होता है, जिसे वॉल्ट मैनेजर के पास सुरक्षित रखा जाता है। यह पूरी तरह से खरीदार की मर्ज़ी है कि वह सोने की फिज़िकल डिलीवरी ले या नहीं। खरीदार आगे की ट्रेडिंग के लिए EGR को अपने डीमैट अकाउंट में रख सकता है या वॉल्ट मैनेजर से सोने की फिजिकल डिलीवरी ले सकता है। ध्यान दें कि वॉल्ट मैनेजर सोना निकालने के लिए कुछ चार्ज लगा सकता है।
EGR की ट्रेडिंग NSE के खास EGR सेगमेंट पर सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:00 बजे से रात 11:30 बजे के बीच होती है। ट्रेडिंग की यह लंबी अवधि भारतीय निवेशकों को इंटरनेशनल मार्केट के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने का मौका देती है। NSE के EGR सेगमेंट पर सेटलमेंट T+1 आधार पर होता है, जिसका मतलब है कि ट्रांज़ैक्शन अगले कामकाजी दिन पूरे होते हैं।
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[ डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है और इसे निवेश, फाइनेंशियल या टैक्स सलाह नहीं माना जाना चाहिए। Electronic Gold Receipts एक नया निवेश प्रोडक्ट है, जिसे सेबी रेगुलेट करता है और यह मार्केट के उतार-चढ़ाव और उससे जुड़े जोखिमों के अधीन है। NSE पर EGR सेगमेंट हाल ही में लॉन्च किया गया एक प्लेटफॉर्म है, इसलिए निवेशकों को निवेश करने से पहले स्कीम से जुड़े सभी दस्तावेज और जानकारियां ध्यान से पढ़नी चाहिए। पाठकों को ज़ोर देकर सलाह दी जाती है कि वे EGR या सोने में निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले SEBI से रजिस्टर्ड किसी निवेश सलाहकार से सलाह जरूर लें।]
