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नोटंबदी के बावजूद इस साल प्रति व्यक्ति आय 10 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान

सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) 2011-12 कीमतों पर 120,280 अरब रुपए हो जाने का अनुमान है जो 2015-16 में 112,220 रुपए अनुमानित है।

Author नई दिल्ली | March 1, 2017 1:59 PM
नोटों की गिनती करता एक व्यक्ति। (तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।)

देश की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय चालू वित्त वर्ष में 10.2 प्रतिशत बढ़कर 1,03,818 रुपए रहने का अनुमान है। सरकार ने मंगलवार (28 फरवरी) को यह आंकड़ा जारी किया। वित्त वर्ष 2015-16 में प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय 94,178 रुपए रही जो इससे पिछले वित्त वर्ष से 8.9 प्रतिशत अधिक रही थी। वर्ष 2016-17 की राष्ट्रीय आय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, ‘वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान प्रति व्यक्ति निवल राष्ट्रीय आय बढ़कर 1,03,818 रुपए हो जाने का अनुमान है। यह 2015-16 के 94,178 रुपए की तुलना में 10.2 प्रतिशत अधिक है।’ सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने यह आंकड़ा जारी किया है।

वास्तविक आधार पर प्रति व्यक्ति आय (2011-12 की कीमतों पर) चालू वित्त वर्ष में 82,112 रुपए रहने का अनुमान है जो 2015-16 में 77,524 रुपए रही। मंत्रालय ने कहा, ‘प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर 2016-17 में 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पिछले साल 6.6 प्रतिशत थी।’ सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) 2011-12 कीमतों पर 120,280 अरब रुपए हो जाने का अनुमान है जो 2015-16 में 112,220 रुपए अनुमानित है।

नोटंबदी को दरकिनार कर Q3 में जीडीपी वृद्धि दर 7%, पूरे वर्ष का वृद्धि अनुमान 7.1% पर बरकरार

नोटबंदी की वजह से आर्थिक गतिविधियों के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंकाओं को दरकिनार करते हुये चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रही है, जबकि पूरे वर्ष की वृद्धि का दूसरा अग्रिम अनुमान भी 7.1 प्रतिशत पर पूर्ववत रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के मंगलवार (28 फरवरी) को जारी तीसरी तिमाही और पूरे वर्ष के अग्रिम अनुमान में चालू वित्त वर्ष की वृद्धि दर को 7.1 प्रतिशत पर कायम रखा है। इससे पहले जनवरी में नोटबंदी के प्रभाव को शामिल किये बिना जारी पहले अग्रिम अनुमान में भी पूरे वर्ष की वृद्धि का यही आंकड़ा जारी किया गया था। इस बीच, सीएसओ ने पहली और दूसरी तिमाही के जीडीपी वृद्धि के संशोधित आंकड़े जारी किये हैं जिनमें पहली तिमाही में संशोधित वृद्धि दर बढ़कर 7.2 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7.4 प्रतिशत हो गई।

ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि तीसरी तिमाही के मध्य में (8 नवंबर, 2016) के नोटबंदी के फैसले से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुये होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने इस दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को कम किया है। इन संगठनों का मानना है कि नोटबंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर अल्पावधि असर हुआ है। सीएसओ ने बयान में कहा कि वर्ष (2011-12) के स्थिर मूल्य पर वास्तविक जीडीपी 2016-17 में 121.65 लाख करोड़ रुपए पर कायम रहने का अनुमान है। जनवरी, 2017 में जारी पहले संशोधित अनुमान में 2015-16 के लिए इसके 113.58 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया गया था।

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