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वित्त मंत्रालय ने कहा, नोटबंदी का सकारात्मक असर अप्रैल से नज़र आएगा

ओईसीडी ने चालू वित्त वर्ष के वृद्धि दर के अनुमान को नोटबंदी के प्रभाव की वजह से 7.4 से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है।

Author नई दिल्ली | February 28, 2017 10:52 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने का एलान किया था। (File Photo)

नोटबंदी का सकारात्मक प्रभाव अप्रैल से बैंकिंग प्रणाली में नई नकदी डालने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिखने लगेगा और इससे आगे चलकर उपभोग में इजाफा होगा। आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकान्त दास ने मंगलवार (28 फरवरी) को यह राय जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच वस्तु एवं सेवा कर में मतभेद के सभी मुद्दों पर आम सहमति बन रही है। इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एक जुलाई से क्रियान्वयन में लाया जाना है। दास ने कहा, ‘नोटबंदी का असर मुख्य रूप से उपभोग पर पड़ा है और यह अस्थायी है। अगली तिमाहियों से इसके दीर्घावधि और मध्यम अवधि के लाभ का नतीजे काफी सकारात्मक होंगे।’

दास ने यहां आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन द्वारा भारत पर आर्थिक सर्वे जारी किए जाने के मौके पर कहा, ‘‘बैंकिंग प्रणाली में नई करेंसी डालने की प्रक्रिया जारी है। यह लगभग पूरी होने वाली है। तिमाही के दौरान उपभोग पर किसी तरह के प्रतिकूल असर का प्रभाव अगले साल तक नहीं खिंचेगा। अब यह पीछे छूट चुका है।’ ओईसीडी ने चालू वित्त वर्ष के वृद्धि दर के अनुमान को नोटबंदी के प्रभाव की वजह से 7.4 से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है।

‘नोटबंदी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक परिदृश्य में एक चमकता स्थान बनी रहेगी’

भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है और नोटबंदी के कारण कुछ समय की नरमी के बावजूद वह वैश्विक परिदृश्य में एक आकर्षक चमकता स्थान बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही। आईएमएफ ने भारत पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है और उसके बाद के वर्ष में यह 7.2 प्रतिशत रह सकती है। आईएमएफ के भारत मिशन प्रमुख पॉल केशिन ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है और वैश्विक परिदृश्य में यह एक चमकता हुआ आकर्षक स्थान बनी रहेगी।’ केशिन ने कहा कि वर्ष 2014 के आखिरी महीनों में विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम घटकर आधे होने के बाद से भारत में आर्थिक गतिविधियां तेज होने लगीं, उसके चालू खाता और वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ और मुद्रास्फीति में भी गिरावट आई। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र में सरकारी घाटे पर अंकुश, कर्ज पर नियंत्रण के जरिये वित्तीय मोर्चे पर लगातार सुदृढ़ीकरण करने तथा मुद्रास्फीति कम करने के मौद्रिक नीति उपायों से देश के वृहदआर्थिक स्थायित्व को मजबूती देने में मदद मिली है।

केशिन ने इस बात पर भी गौर किया कि भारत सरकार ने महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। इससे मजबूत और सतत् आर्थिक वृद्धि में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के प्रस्तावित क्रियान्वयन से निकट भविष्य में भारत की आर्थिक वृद्धि दर को आठ प्रतिशत से ऊपर पहुंचाने में मदद मिलेगी। जीएसटी क्रियान्वयन से भारत में राज्यों के बीच सामान और सेवाओं की आवाजाही और उत्पादन क्षमता बेहतर होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसमें संतोष करके बैठ जाने की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने माना कि नोटबंदी की वजह से नकदी की भारी तंगी के चलते आर्थिक गतिविधियां गड़बड़ाई हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इस दौरान भुगतान समस्याओं को दूर करने के लिये कई उपाय किये। कुछ समय के लिये पुराने नोटों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई। ईंधन और कृषि कार्यों के लिये पुरानी मुद्रा के इस्तेमाल की अनुमति देकर नोटबंदी के नकारात्मक प्रभाव को कम करने का प्रयास किया गया। केशिन ने कहा, ‘इसलिये हमें लगता है कि आर्थिक नरमी सीमित दायरे में रहेगी और लंबी नहीं खिंचेगी। देश का वित्तीय तंत्र इससे अछूता रहेगा। हॉ, बैंकों के कर्ज भुगतान पर ध्यान देना होगा। विशेषतौर से बैंकों की गैर-निष्पादित राशि (एनपीए) के उच्चस्तर को देखते हुये इस पर गौर करना जरूरी है।’

 

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