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नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण अब सीधे किसानों से खरीद पाएंगे जमीन

शहर में जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए तैयार हुई नई नीति को यूपी कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है। मंजूरी मिलने से तीनों, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण सीधे किसानों से जमीन खरीद सकेगी।

Author नोयडा | Published on: February 18, 2016 4:54 AM

शहर में जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए तैयार हुई नई नीति को यूपी कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है। मंजूरी मिलने से तीनों, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण सीधे किसानों से जमीन खरीद सकेगी। जमीन अधिग्रहण प्रस्तावों को डीएम और कमिश्नर की अध्यक्षता वाली कमिटियों की मंजूरी लेने के कारण देरी का सामान नहीं करना पड़ेगा। प्राधिकरण अफसरों के मुताबिक, नई नीति तीनों शहरों के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी। अलबत्ता किसानों से सीधे जमीन खरीदने से पहले उसका तय इस्तेमाल बताना होगा। साथ ही जमीन अधिग्रहण के तुरंत बाद निर्माण कार्य शुरू करना जरूरी होगा।

उल्लेखनीय है कि अभी तक प्राधिकरण अरजैंसी क्लॉज लगाकर किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने के कई सालों बाद तक इस्तेमाल तय नहीं करता था। बाद में उसे कई गुना ज्यादा रेट पर निजी बिल्डरों को बेचता था। इसका किसान विरोध करते रहे हैं। विकास को रफ्तार देने के लिए प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने का फैसला किया है। किसानों से सीधे खरीदे जाने वाली जमीन का इस्तेमाल पहले से तय होगा।

नई नीति के आधार पर तय कीमत पर किसानों से जमीन लेने के तुरंत बाद वहां संबंधित विकास कार्य शुरू करने होंगे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण के लिए जमीन अधिग्रहण की नई पॉलिसी को यूपी कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूर कर लिया है। अब जमीन अधिग्रहण के लिए डीएम या कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समितियों की इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजेश प्रकाश ने बताया कि नई पॉलिसी को तीनों प्राधिकरणों में जमीन अधिग्रहण के झंझट के कारण बेवजह की होने वाली देरी से बचने के लिए तैयार कराया गया है। किसानों से तय रेट पर तभी जमीन खरीदी जाएगी, जब उसकी जरूरत होगी। साथ ही जमीन लेने से पहले रिहायशी, बिल्डर, ग्रुप हाउसिंग, औद्योगिक या व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाएगा, यह भी किसानों को बताना होगा।

तीनों जगहों पर शहरी क्षेत्र के रूप में चिन्हित जमीन का सर्कल रेट से दोगुनी कीमत पर खरीदा जाएगा। जबकि शहर की सीमा से बाहर की जमीन का सर्कल रेट के मुकाबले चार गुना रेट पर खरीदा जाएगा। हालांकि नई पॉलिसी लागू होने के बाद गौतम बुद्ध नगर में प्राधिकरणों के अलावा अन्य कोई सीधे किसानों से जमीन नहीं खरीद पाएगा।

अथॉरिटी अफसरों के मुताबिक, जटिल जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाना और किसानों से सीधे जमीन खरीदकर अवैध कालोनियां बनाने पर रोक लगाने के इरादे से तैयार किया गया है। आगामी दिनों में कैबिनेट से इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

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