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रिजर्व बैंक बोला- नोटबंदी से अर्थव्‍यवस्‍था पर असर नहीं, जीडीपी दर में कमी से चौंक गए उर्जित पटेल

उर्जित पटेल ने कहा कि मुद्रास्फीति का आंकड़ा कम होने के पीछे अस्थायी कारक हो सकते हैं जो नवंबर से ही देखा जा रहा है और साथ ही दलहन, अनाज और सब्जी के मामले में अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति है।

Author June 7, 2017 9:03 PM
रिजर्व़ बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल (File Photo)

रिजर्व बैंक ने बुधवार (7 जून) को कहा कि नोटबंदी से आर्थिक वृद्धि में कमी नहीं आयी है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों के मामले में यथास्थिति बनाये रखी है और मुद्रास्फीति में वर्तमान नरमी तथा जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट को अचंभित करने वाला करार दिया है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के संशोधित वृद्धि के आंकड़े में जीडीपी वृद्धि में गिरावट पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा, ‘‘आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक गतिविधियों में नरमी की शुरूआत वित्त वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही में दिखने लगी थी जबकि नोटबंदी उससे बहुत बाद में की गयी।’’

उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कुछ आंकड़े भी रखे। उन्होंने कहा कि 2016-17 की दूसरी छमाही में नकदी पर अधिक निर्भर रहने वाले खनन और उत्खनन क्षेत्र में मजबूती रही, ग्रामीण मजदूरी में निरंतर वृद्धि देखी गयी तथा विनिर्माण, बिजली, होटल, परिवहन और संचार जैसे अन्य क्षेत्रों में भी मजबूती रही। डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि चीजों में स्पष्टता का अभाव है, जहां मुद्रास्फीति के अप्रैल में घटकर 3 प्रतिशत पर आने तथा सीएसओ द्वारा आर्थिक वृद्धि को संशोधित कर 6.1 प्रतिशत करने जैसे कुछ ताज्जुब करने वाली गतिविधियां हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिये मुद्रास्फीति आंकड़े के साथ-साथ सीएसओ के संशोधित आंकड़े अचंभित करने वाले रहे। हम इस बारे में अपनी समझ बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर अगले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था में क्या होने जा रहा है।’’

आचार्य ने कहा कि आरबीआई ने 2017-18 की दूसरी छमाही के लिये मुद्रास्फीति के अनुमान को कम कर 3.5 से 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है जो पहले 5 प्रतिशत था और दरों पर काम करने से पहले और स्पष्टता आने का इंतजार करेगा। विरल आचार्य ने कहा, ‘‘हमें अगले एक-दो महीने यह देखने की जरूरत है कि मुद्रास्फीति हमारे मध्यम अवधि के अनुमान के दायरे में रहती है या संशोधित अनुमान की तुलना में भी हैरान करने वाली चीजें होती है।’’

उर्जित पटेल ने कहा कि मुद्रास्फीति का आंकड़ा कम होने के पीछे अस्थायी कारक हो सकते हैं जो नवंबर से ही देखा जा रहा है और साथ ही दलहन, अनाज और सब्जी के मामले में अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति है। उन्होंने कहा, ‘‘कई चीजों और परिदृश्य को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के छह सदस्यों में से पांच ने यथास्थिति बनाये रखने के पक्ष में मतदान किया और अधिक स्पष्टता के लिये आने वाले आंकड़ों को देखने के लिये इंतजार करने का निर्णय किया।’’

हालांकि पटेल ने कहा कि ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि, खपत मांग में वृद्धि तथा सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्तों के लागू होने जैसे कारणों से मुद्रास्फीति के ऊपर जाने का जोखिम बना हुआ है और इसीलिए केंद्रीय बैंक ने तटस्थ रूख बनाये रखा और नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया। यह पूछे जाने पर कि क्या एमपीसी के एक सदस्य की असहमति यह बताता है कि समिति परिपक्व हो गयी है, पटेल ने कहा कि यह देखो और इंतजार करो के रूख को प्रतिबिंबित करता है।

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