फिलहाल राहत की गुंजाइश नहीं, अभी और महंगा होगा डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस के भी बढ़ सकते हैं दाम

डीजल और पेट्रोल के लगातार बढ़ते दाम से त्रस्त आम लोगों को फिलहाल कोई राहत मिलने की गुंजाइश नहीं है। सरकार टैक्स कम करने से मना कर रही है और कच्चा तेल का भाव बढ़ता जा रहा है।

Diesel Petrol Price Rise
आम लोगों को महंगे डीजल-पेट्रोल से राहत मिलने की गुंजाइश नहीं है। (Express Photo)

डीजल-पेट्रोल के रेट (Diesel Petrol Rate) कई राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर के पार जा चुके हैं। लंबे समय से आम लोग इनकी कीमतों में कमी की आस लगाए बैठे हैं। ऐसे ग्राहकों के लिए यह बुरी खबर है। आने वाले समय में डीजल-पेट्रोल के भाव और ऊपर जा सकते हैं। इनके अलावा रसोई गैस (LPG) के दाम भी और बढ़ सकते हैं।

तीन साल के उच्च स्तर पर है Crude Oil

दरअसल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल (Crude Oil) लगातार महंगा हो रहा है। इसी सप्ताह कच्चा तेल तीन साल में पहली बार 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के पार गया है। इसमें अभी और तेजी आने के ही अनुमान हैं। कच्चा तेल के निर्यातक देशों के समूह ओपेक (OPEC) की मानें तो महामारी के बाद दुनिया भर में कच्चा तेल की मांग बढ़ रही है। वैकल्पिक ईंधनों पर जोर देने के बाद भी फिलहाल कच्चा तेल की मांग कम होने के आसार नहीं हैं। गोल्डमैन सैक्स ने एक रिपोर्ट में अनुमान जाहिर किया है कि इस साल के अंत तक कच्चा तेल वैश्विक बाजार में 90 डॉलर प्रति बैरल तक का स्तर छू सकता है।

दिसंबर तक पांच रुपये महंगे हो सकते हैं Diesel Petrol Rate

भारत में डीजल और पेट्रोल के दाम कंपनियां वैश्विक कीमतों के आधार पर तय करती हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में की गई वृद्धि के बाद अभी दिल्ली में डीजल 89.57 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल 101.39 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। जैसे-जैसे वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा होगा, भारत में डीजल और पेट्रोल के भाव भी चढ़ते रहेंगे। यदि कच्चा तेल एक डॉलर प्रति बैरल बढ़ता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल 50 पैसे प्रति लीटर के आस-पास महंगा हो जाता है। अगर गोल्डमैन सैक्स के अनुमान ठीक रहते हैं तो इस साल के अंत तक भारत में डीजल-पेट्रोल पांच रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है।

टैक्स में कटौती के बिना राहत की कोई गुंजाइश नहीं

अभी भारत में डीजल और पेट्रोल पर करीब 60 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है। इसे ऐसे समझें कि यदि आप 100 रुपये में एक लीटर पेट्रोल खरीद रहे हैं, तो इसमें करीब 60 रुपये सरकार के खजाने में कर के रूप में जा रहा है। इसमें से करीब 32 रुपये अकेले केंद्र सरकार के खजाने में जा रहा है। इस स्थिति में महंगे डीजल-पेट्रोल से आम जनता को सिर्फ तभी राहत मिल सकती है, जब सरकार कर में कटौती करे।

टैक्स कम करने से सरकार का इनकार

कई विशेषज्ञों की राय है कि यदि डीजल-पेट्रोल को जीएसटी (GST) के दायरे में लाया जाए तो इनके दाम में कुछ कमी आ सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) इस महीने लखनऊ में जीएसटी परिषद की बैठक के बाद साफ कर चुकी हैं कि ऐसा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा था कि परिषद ने सिर्फ इस कारण डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा की, क्योंकि केरन हाई कोर्ट ने ऐसा करने को कहा था। हमने चर्चा कर ली है और हम केरल हाई कोर्ट को बता देंगे कि यह नहीं हो सकता है।

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इससे एक महीने पहले पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Petroleum Minister Hardeep Singh Puri) ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की संभावनाओं से इनकार किया था। यदि घरेलू मोर्चे पर टैक्स में कमी नहीं की जाती है और विदेशी बाजार में कच्चा तेल का भाव बढ़ते रहता है, तो साफ है कि आम जनता के ऊपर बोझ कम होने के बजाय बढ़ेगा ही।

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