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निर्माणाधीन परियोजनाओं को राहत नहीं

नोएडा में मेट्रो और एक्सप्रेस-वे के किनारे जमीन के भाव प्राधिकरण ने बढ़ा दिए हैं। मेट्रो के पास आवासीय भूखंड की कीमत में पांच फीसद और एक्सप्रेस-वे के किनारे वाले प्लॉट की कीमत में साढ़े सात फीसद की बढ़ोतरी की गई है।

निर्माणाधीन अधिकांश ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में देरी हो रही है।

बिल्डर और ग्रुप हाउसिंग श्रेणी की निर्माणाधीन परियोजनाओं को नोएडा की बोर्ड बैठक से मिला टाइम एक्सटेंशन (समय विस्तार) अर्थदंड में राहत के प्रस्ताव का लाभ फिलहाल नहीं मिल पाएगा। क्रेडाई समेत बिल्डरों की मांग पर विकासकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए समूचे भूखंड के स्थान पर सिर्फ उतने हिस्से पर ही क्षेत्रफल के प्रीमियम पर समय विस्तार शुल्क अधिरोपित करने का प्रस्ताव तैयार किया था जिसका निर्माण पूरा नहीं हुआ है, लेकिन प्राधिकरण बोर्ड ने प्रस्ताव को मंजूर करने के साथ एक शर्त लगा दी है।

शर्त के अनुसार, यह व्यवस्था नए आबंटित परियोजनाओं पर ही लागू होगी। यानी वर्तमान में जो भी बिल्डर या ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं और निर्धारित समयावधि में काम पूरा नहीं कर पाती हैं तो उन्हें पहले की तरह समयवृद्धि अर्थ दंड भरना होगा। जबकि बोर्ड की मंजूरी के बाद आबंटित होने वाले भूखंडों पर लीज डीड की शर्तों के मुताबिक निर्माण कार्य पूरा कर अधिभोग प्रमाणपत्र नहीं लेने वालों पर समयवृद्धि अर्थ दंड निर्माण की स्थिति के आधार पर लगेगा।

कारोबार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, पिछले कई सालों की मंदी के चलते शहर में निर्माणाधीन अधिकांश ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में देरी हो रही है। बिल्डर परियोजनाओं को ऋण मिलने में दिक्कत, खरीदारों से नियमित भुगतान नहीं होने समेत नए खरीदारों की कमी, देरी की सबसे बड़ी वजह बन रही है। लीज डीड की शर्तों के अनुसार आबंटी को आबंटन के पांच साल के भीतर योजना का निर्माण कर अधिभोग प्रमाणपत्र हासिल करना होता है। अधिभोग प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही कब्जा देने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू होती है। बीते सालों में परियोजनाओं में ना तो बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हुआ और ना ही खरीदारों को कब्जा मिला है।

बिल्डरों पर प्राधिकरण का कई हजार करोड़ रुपए बकाया है। इस स्थिति से बाहर आने और परियोजना को पूरा करने के लिए बिल्डर कंपनियों की मांग है कि समयवृद्धि अर्थ दंड में राहत दी जाए। पहले के नियम के अनुसार समयवृद्धि लेने वाले बिल्डर पर देरी की एवज में पूरे भूखंड के क्षेत्रफल के आधार पर जुर्माना लगाया जाता था। इस स्थिति में निर्माण की स्थिति का आकलन नहीं किया जाता है। जबकि प्राधिकरण बोर्ड से हाल में मंजूर प्रस्ताव के मुताबिक ढांचे के आधार पर समयवृद्धि जुर्माना लिया जाएगा। मसलन किसी बिल्डर ने यदि 60 फीसद निर्माण कार्य पूरा कर लिया है, तो उससे शेष 40 फीसद निर्माण को पूरा करने के लिए समयवृद्धि जुर्माना वसूला जाएगा।

मेट्रो और एक्सप्रेस-वे के किनारे की जमीन के भाव बढ़ाए
नोएडा में मेट्रो और एक्सप्रेस-वे के किनारे जमीन के भाव प्राधिकरण ने बढ़ा दिए हैं। मेट्रो के पास आवासीय भूखंड की कीमत में पांच फीसद और एक्सप्रेस-वे के किनारे वाले प्लॉट की कीमत में साढ़े सात फीसद की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही शहर में फ्लैट और संस्थागत भूखंड भी महंगे होने के आसार हैं क्योंकि प्राधिकरण ने ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं और संस्थागत भूखंडों की दर में सात फीसद की बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। दूसरी तरफ, प्राधिकरण ने दो फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) वाले वाणिज्यिक भूखंड ( छोटे शॉपिंग कांप्लेक्स) की आबंटन दर में 15 फीसद की कमी की है। ऐेसे स्थानों पर बनी दुकानों को खरीदना सस्ता हो जाएगा। हालांकि चार एफएआर वाले वाणिज्यिक भूखंड की दर में कोई परिवर्तन नहीं किया है।

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