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विशेषज्ञों ने उठाए ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता पर सवाल, कहा- देश में उत्‍पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ा

इस रपट को इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (आईएसआईडी) के सेवानिवृत्त प्रोफेसर केएस चलपति राव और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिस्वाजीत धर ने तैयार किया है।

Author नई दिल्ली | January 15, 2017 6:44 PM
सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की सफलता के दावों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए दो जानेमाने विशेषज्ञों ने अपने आकलन में कहा है कि इस कार्यक्रम से प्रमुख क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की सफलता के दावों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए दो जानेमाने विशेषज्ञों ने अपने आकलन में कहा है कि इस कार्यक्रम से प्रमुख क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। रपट में कहा गया है कि निवेश की परख घरेलू उत्पादन में नई क्षमता विस्तार से की जानी चाहिए ना कि घरेलू कोष को घुमा फिराकर निवेश करने के रूप में की जानी चाहिए। रपट के अनुसार भारत के विकास में एफडीआई योगदान के बारे में दिए जाने वाले बयान भ्रमित करने वाले हो सकते हैं और इसमें इन महत्वपूर्ण पक्षों (नई क्षमता विस्तार) की अनदेखी की जाती है। भारत को इस संबंध में एक लक्ष्य आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

इस रपट को इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (आईएसआईडी) के सेवानिवृत्त प्रोफेसर केएस चलपति राव और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिस्वाजीत धर ने तैयार किया है। इस संबंध में आईएसआईडी ने एक अध्ययन कराया था। गौरतलब है कि सरकार ने सितंबर 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरूआत की थी ताकि रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण समेत 25 क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके। इससे पहले अमेरिका के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में तैनात भारतीय मूल के कुलपति का कहना है कि ‘मेक इन इंडिया’ यथार्थ से ज्यादा राष्ट्रवादी दिखाई पड़ता है और रणनीति को हकीकत में बदलने के लिए पर्याप्त अवसंरचना, साजो सामान और पूरी तरह समायोजित अफसरशाही की जरूरत है।

दो साल पहले मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने अपनी सरकार की तरफ से निवेशकों को सरल व कारगर व्यवस्था उपलब्ध कराने का वादा किया था। उन्‍होंने कहा था कि अब सरकार का ध्यान ढांचागत सुविधाओं को खड़ा करने के साथ-साथ भारत को निर्माण गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनाने के लिए डिजिटल नेटवर्क तैयार करने पर है, ताकि देश में कार से लेकर साफ्टवेयर, उपग्रह से लेकर पनडुब्बी तक और औषधि से लेकर बंदरगाह व कागज से लेकर बिजली तक का निर्माण यहां किया जा सके।

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