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पैकेज पर एक्सपर्ट्स की राय- नकदी कम, गारंटी ज्यादा; विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री बोले- टैक्स में राहत काफी नहीं

विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने इस पैकेज को लेकर कहा है कि इससे ज्यादा अहम यह होगा कि हम लॉकडाउन से किस तरह से निकलते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ टैक्स में राहत देना ही काफी नहीं है।

economic packageएक्सपर्ट्स बोले, टैक्स में राहत काफी नहीं, गरीबों को मिलना चाहिए कैश

पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के मेगा पैकेज में से करीब 6 लाख करोड़ रुपये के हिस्से के बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को विस्तार से जानकारी दी थी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को कर्ज के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के पैकेज जारी करने और बिजली कंपनियों में 90,000 करोड़ रुपये डालने जैसे अहम कदमों का वित्त मंत्री ने ऐलान किया है। इस पैकेज को लेकर देश के दिग्गज अर्थशास्त्रियों और एक्सपर्ट्स की राय भी सामने आई है। एक तरफ कई एक्सपर्ट्स ने इसे रोजगार के अवसरों के लिए एक अच्छा उपाय बताया है तो कई जानकारों का कहना है कि गरीबों के हाथों में रकम पहुंचाने की जरूरत है। आइए जानते हैं, निर्मला के पैकेज पर किस दिग्गज की है क्या राय…

गरीबों के हाथों में देनी चाहिए रकम: विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने इस पैकेज को लेकर कहा है कि इससे ज्यादा अहम यह होगा कि हम लॉकडाउन से किस तरह से निकलते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ टैक्स में राहत देना ही काफी नहीं है। गरीब लोगों को कैश दिया जाना चाहिए। हालांकि इसके चलते महंगाई भी बहुत नहीं बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय में मैं भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत देखता हूं। समस्या लोगों की धारणा भी है, जो ज्यादा खतरा मान रहे हैं। इससे रिकवरी का पूरा प्रॉसेस ही प्रभावित हो सकता है। हमें यह देखना है कि हम कैसे इसे बैलेंस करते हैं।

लोन पर बिगड़ा है माहौल, गहरा सकता है संकट: CRISIL रिसर्च की डायरेक्टर ईशा चौधरी ने पैकेज को लेकर कहा, ‘3 लाख करोड़ रुपये की गारंटी के जरिए कैश के संकट में फंसे MSME सेक्टर को लोन तौर पर नकदी मिल सकेगी। हालांकि इससे क्रेडिट कल्चर के खराब होने का भी रिस्क है। बैंकर्स के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है और इस तरह आपात राशि जारी करने से जोखिम बढ़ सकता है।’

इस पैकेज का सरकारी खजाने पर ज्यादा असर नहीं: अर्नेस्ट ऐंड यंग इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्तव ने बिजनेस टुडे से बातचीत में कहा, ‘यह पैकेज मुख्य तौर पर क्रेडिट गारंटी के प्रावधानों पर आधारित है, जिसका सरकार के खजाने पर कम ही असर होगा। भविष्य में किसी तरह के डिफॉल्ट पर ही इसकी कोई कीमत चुकानी होगी। बिजली कंपनियों के लिए पैकेज की बात करें वहां भी डिफॉल्ट की स्थिति में बोझ राज्य सरकारों को ही वहन करना होगा।’

पनगढ़िया बोले, रोजगार पर है फोकस: देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद पनगढ़िया ने इस पैकेज की सराहना करते हुए कहा है कि इसे एमएसएमई पर फोकस किया गया है, जहां रोजगार के काफी अवसर होते हैं। यह देखना होगा कि सरकार की ओर से अगली किस्त में क्या आता है। बड़े औद्योगिक घरानों को भी मदद की जरूरत है जो उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। सरकार इनके लिए क्या करती है, यह भी आने वाले दिनों में देखना होगा।

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