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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया यस बैंक को बचाने का प्लान, ऐलान के तीन दिन बाद हट जाएंगी पाबंदियां

Nirmala Sitharaman on Yes Bank: एसबीआई की ओर से निवेश की गई रकम के साथ यह शर्त होगी कि उसका 26 फीसदी तक हिस्सा अगले तीन सालों तक बना रहेगा। इसके अलावा अन्य निवेशक अपनी 75 रकम को 3 सालों के लिए यस बैंक में रखेंगे।

nirmala sitharamanवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

Nirmala Sitharaman on Yes Bank: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यस बैंक को बचाने के प्लान का शुक्रवार को ऐलान किया। मीडिया से बात करते हुए फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंक में एसबीआई की ओर से 49 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदी जाएगी, जबकि अन्य निवेशकों को भी इसके लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि एसबीआई की ओर से निवेश की गई रकम के साथ यह शर्त होगी कि उसका 26 फीसदी तक हिस्सा अगले तीन सालों तक बना रहेगा। इसके अलावा अन्य निवेशक अपनी 75 रकम को 3 सालों के लिए यस बैंक में रखेंगे।

उन्होंने कहा कि जल्दी ही यस बैंक के रिकंस्ट्रक्शन की इस स्कीम का ऐलान किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि स्कीम का ऐलान होने के तीन दिनों के अंदर यस बैंक का moratorium समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही सभी पाबंदियों को वापस ले लिया जाएगा। यही नहीं उन्होंने बताया कि यस बैंक के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी होने के अगले 7 दिनों के अंदर नए बोर्ड का गठन होगा, जिसमें एसबीआई के दो डायरेक्टर भी शामिल होंगे।

जानें, कौन लगा रहा कितना पैसा: बता दें कि यस बैंक को उबारने की अगुवाई देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई कर रहा है। इसके अलावा एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और कोटक महिंद्रा बैंक भी यस बैंक में निवेश करने वाले हैं। एसबीआई की ओर से केंद्रीय बैंक को भेजे गए प्लान के मुताबिक वह यस बैंक में 7,250 करोड़ रुपये निवेश करेगा। इसके अलावा बाकी तीन बैंक 1-1 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डालेंगे। यही नहीं इस प्लान में देश के दिग्गज रिटेलर राधाकिशन दमानी और अजीम प्रेमजी ट्रस्ट भी जुड़े हैं। दोनों की ओर से 500 करोड़ रुपये की रकम डाली जाएगी। आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड की मीटिंग में भी 1,000 करोड़ रुपये के निवेश के प्लान को मंजूरी दे दी गई है।

आरबीआई का फिलहाल नियंत्रण: गौरतलब है कि बीते दिनों यस बैंक पर आरबीआई ने नियंत्रण स्थापित कर लिया था। कभी देश के 5वें नंबर के सबसे बड़े बैंक रहे यस बैंक के ग्राहकों पर महीने में 50,000 रुपये से ज्यादा की निकासी पर भी रोक लगा दी गई थी। यह रोक 3 अप्रैल, 2020 तक जाने की रहने की संभावना है। हालांकि यदि कोई रिवाइवल स्कीम जारी होती है तो उससे पहले भी पाबंदियों को वापस लिया जा सकता है।

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