वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों से कहा है कि वे बिजनेस के लिए जरूरी समझदारी से समझौता किए बिना देश के युवाओं की नजर में अपनी ‘कूल’ इमेज को बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों को 2 अक्टूबर से 16 साल से ज्यादा उम्र के युवाओं पर फोकस करते हुए एक महीने का कैंपेन चलाना चाहिए।
राजधानी में PSB कॉन्फ्लुएंस कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन सीनियर बैंकिंग अधिकारियों को संबोधित करते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि आज के युवा टेक्नोलॉजी के साथ बड़े हुए हैं। वह चाहते है कि बैंकिंग आसान, पर्सनलाइज़्ड और हर समय उपलब्ध हो। और PSBs को इन उम्मीदों के साथ तालमेल बिठाने की जरूरत है।
सीतारमण ने कहा कि पब्लिक सेक्टर बैंकों की छवि आज भी लोगों के बीच पुराने सरकारी बैंकों जैसी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि 25 साल से कम उम्र के युवाओं से बातचीत के दौरान उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि किसी ने भी उस सरकारी बैंक का नाम नहीं लिया, जिसमें उसका अकाउंट है।
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उन्होंने बताया कि जब उन्होंने युवाओं से पूछा कि वे प्राइवेट बैंकों को क्यों पसंद करते हैं, तो युवाओं ने सरकारी बैंकों का नाम लेने में भी हिचकिचाहट दिखाई। उनके जवाब से ऐसा लगा कि युवाओं को सरकारी बैंक ‘कूल’ नहीं लगते। सीतारमण ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि सरकारी बैंकों की ऐसी छवि बनी रहे। उन्होंने बैंकों से अपील की कि वे युवाओं से बात करें और समझें कि उन्हें बैंक की कौन-सी चीजें ‘कूल’ लगती हैं, ताकि ग्राहकों के सामने सरकारी बैंक भी ज्यादा आधुनिक और आकर्षक नजर आएं।
साथ ही, सीतारमण ने साफ किया कि उनका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि सरकारी बैंक सिर्फ ‘कूल’ दिखने के लिए अपने बैंकिंग के जरूरी नियमों और समझदारी से समझौता करें। उन्होंने कहा कि बैंकिंग एक ‘सीरियस बिज़नेस’ है और बैंकों को आधुनिक और युवाओं के लिए आकर्षक बनने के साथ-साथ सही तरीके से काम करने का संतुलन भी बनाए रखना होगा।
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उन्होंने कहा कि प्राइवेट बैंकों की युवाओं के बीच ऐसी इमेज बन गई है कि वे बैंकिंग के मामले में गंभीर होने के साथ-साथ ‘काफी कूल’ भी हैं।
वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा आयोजित की गई दो दिन की PSB कॉन्फ्लुएंस मीटिंग में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की ग्रोथ के अगले फेज़ से जुड़े सात थीम पर चर्चा हुई।
सोमवार को डिपॉजिट मोबिलाइज़ेशन, युवाओं के लिए बैंकिंग, इन्वेस्टमेंट साइकिल को सपोर्ट करने और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पर चर्चा के बाद मंगलवार को फोकस एग्रीकल्चर और हॉर्टिकल्चर वैल्यू चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग और क्रेडिट कार्ड बिज़नेस को फिर से सोचने पर था।
