Nirmala Sitharaman export solid Change in 2017 - Jansatta
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वर्ष 2017 में निर्यात के मोर्चे पर हो सकता है ठोस बदलाव

वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार नवंबर में निर्यात 2.29 प्रतिशत बढ़कर 20 अरब डॉलर रहा है।

Author नई दिल्ली | December 18, 2016 5:25 PM
केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण। (पीटीआई फाइल फोटो)

पिछले लगातार दो साल तक निर्यात के मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन के बावजूद सरकार हतोत्साहित नहीं है। सरकार को विश्वास है कि 2017 के साल में निर्यात के मामले में एक सकारात्मक और ठोस बदलाव देखने को मिलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘मैं नए साल की ओर देख रही हूं। नए साल में निर्यात के मोर्चे पर निश्चित रूप से सकारात्मक और मजबूत अंतर देखने को मिलेगा। पिछला साल वास्तव में काफी सुस्त रहा। मुझे उम्मीद है कि नए बाजार सामने आएंगे।’ पिछले तीन माह के दौरान निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज हुई है जिसकी वजह से मंत्री ने यह उम्मीद जताई है। दिसंबर, 2014 से लगातार 18 महीने यानी मई, 2016 तक निर्यात नीचे आया। कमजोर वैश्विक मांग तथा तेल कीमतों में गिरावट से निर्यात घटा। इस साल जून से निर्यात में फिर बढ़ोतरी देखने को मिली। जुलाई और अगस्त में यह फिर घटा गया। हालांकि, सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में निर्यात फिर बढ़ा।

वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार नवंबर में निर्यात 2.29 प्रतिशत बढ़कर 20 अरब डॉलर रहा है। निर्यातकों ने भी नए साल को लेकर उम्मीद जताई है। निर्यातकों के प्रमुख संगठन फियो के अनुसार कुल 30 महत्वपूर्ण उत्पादों में से 20 में पिछले कुछ माह से सकारात्मक रुख दिखाई दे रहा है। फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा, ‘यदि यह रुख कायम रहता है, तो हम चालू वित्त वर्ष में 280 अरब डॉलर या इससे अधिक निर्यात हासिल कर सकते हैं।’ हालांकि, एस सी रल्हन ने आगाह करते हुए कहा कि मांग में कमजोर वृद्धि, जिंस कीमतों में गिरावट, मुद्रा युद्ध और तेज हो सकता है जिससे 2017 में निर्यात के मोर्चे पर चुनौतियां आ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनिश्चित वैश्विक सुधार संभवत: देश के निर्यात के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

भारतीय निर्यातकों के दो प्रमुख बाजारों में अमेरिका और यूरोप शामिल हैं। इन बाजारों में मांग में अभी तक खास सुधार नहीं दिखा है। देश के निर्यात में इन बाजारों का हिस्सा 30 प्रतिशत से अधिक है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिश्वजीत धर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं है। विश्व बाजार में बेचैनी है। धर ने कहा कि नोटबंदी से भी निर्यातक विशेषरूप से एमएसएमई क्षेत्र के निर्यातक प्रभावित हुए हैं। इस क्षेत्र का देश के निर्यात में 45 प्रतिशत हिस्सा है। हस्तशिल्प जैसे श्रम आधारित क्षेत्र पहले ही नोटबंदी को लेकर चिंता जता चुके हैं। निर्यात आंकड़े को बढ़ाने के लिए कारोबार सुगमता एक और महत्वपूर्ण मानदंड है। सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं और आयात और निर्यात के लिए दस्तावेजों की संख्या को कम किया है।

वाणिज्य मंत्रालय व्यापारियों के लिए लेनदेन की लागत को कम करने के लिए कदम उठा रहा है। ऊंची ढुलाई दर को कम करने के लिए यह रेलवे और वित्त मंत्रालयों से बातचीत कर रहा है। चिंता की बात यह है कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने 2017 के लिए व्यापार वृद्धि के अनुमान को घटा दिया है। डब्ल्यूटीओ के अनुसार 2017 में विश्व व्यापार की वृद्धि 3.6 प्रतिशत रहेगी। यह 1990 से हासिल पांच प्रतिशत की वृद्धि से कहीं कम होगी। पिछले पांच वित्त वर्षों से भारत का निर्यात 300 अरब डॉलर के आसपास बना हुआ है। 2015-16 में यह 261.13 अरब डॉलर रहा। 2014-15 में यह 310.33 अरब डॉलर और 2013-14 में 314.4 अरब डॉलर रहा। 2012-13 में 300.4 अरब डॉलर और 2011-12 में यह 307 अरब डॉलर रहा।

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