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मजदूरों से दिन में 12 घंटे की दिहाड़ी करवा सकेंगी कंपनियां, नए लेबर रूल में हो सकता है प्रावधान

यह लेबर कोड मौजूदा 13 केंद्रीय श्रम कानून की जगह लेगा। हालांकि पहले की तरह ही ड्राफ्ट में यह बात भी कही गई है कि कर्मचारियों से सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता।

factory workersदिन भर में अधिकतम 12 घंटे कर्मचारियों से काम करा सकेंगी कंपनियां

केंद्रीय श्रम मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए नए लेबर कोड के ड्राफ्ट में कर्मचारियों के वर्किंग आवर्स को दिन में 12 घंटे तक किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे पहले यह अवधि 9 घंटे की थी और इसमें एक घंटे का रेस्ट भी शामिल था। ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडीशंस के नाम से तैयार कोड में सरकार ने कंपनियों को एक दिन में 12 घंटे तक वर्किंग आवर्स रखने की छूट देने की बात कही है। आने वाले दिनों में मजदूर संघों की ओर से इसका विरोध देखने को मिल सकता है।

यह लेबर कोड मौजूदा 13 केंद्रीय श्रम कानून की जगह लेगा। हालांकि पहले की तरह ही ड्राफ्ट में यह बात भी कही गई है कि कर्मचारियों से सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता। ड्राफ्ट रूल्स में कहा गया है कि कर्मचारियों के काम के घंटे इस तरह से तय किए जाएंगे कि उसमें रेस्ट के लिए इंटरवल का वक्त भी शामिल हो और दिन भर में 12 घंटे से ज्यादा का वर्किंग पीरियड न हो।

फिलहाल इस ड्राफ्ट पर श्रम मंत्रालय ने अगले 45 दिनों में संबंधित पक्षों से राय मांगी है। इस कोड के अलावा 4 अन्य कोड्स को भी श्रम मंत्रालय ने पेश किया है। केंद्र सरकार की योजना लेबर को़ड्स को जनवरी तक संसद से मंजूरी दिलाने की है। ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडीशंस कोड में सरकार ने यह भी तय किया है कि यदि सप्ताह में कोई कर्मचारी ओवरटाइम करता है तो उस अवधि का उसे डबल मेहनताना दिया जाएगा।

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यदि कर्मचारी किसी दिन 8 घंटे से ज्यादा या फिर सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम करता है तो फिर उसे ओवरटाइम का मेहनताना सामान्य सैलरी से दोगुना मिलेगा। यही नहीं ओवरटाइम के कैलकुलेशन को लेकर भी नियम तय किया गया है। यदि कोई कर्मचारी 15 से 30 मिनट तक काम करता है तो फिर उसे पूरे 30 मिनट के तौर पर काउंट किया जाएगा।

इसके अलावा मासिक सैलरी की बात की जाए तो यह 1/26 प्रतिदिन दिहा़ड़ी के आधार पर तय की जाएगी। सैलरी के लिए इससे कम का कैलकुलेशन नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पिछले दिनों कहा था कि यदि किसी श्रम सुधार से श्रमिकों के हितों की रक्षा नहीं होती है तो उसे सुधार नहीं कहा जा सकता है।

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