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मोदी सरकार ने लिया ऐसा फैसला, महंगी हो सकती है घरेलू रसोई गैस और सीएनजी

फर्टिलाइजर और बिजली कंपनियां घरेलू गैस खरीदने के अलावा एलएनजी (लिक्यूफाइड नेचुरल गैस) भी इंपोर्ट करती हैं। सरकार ने घरेलू क्षेत्रों में उत्पादित प्राकृतिक गैस की कीमत निर्धारित करने के लिए अक्टूबर 2014 में एक नए फॉर्मूला को मंजूरी दे दी थी।

करीब कुल 70 मिलियन क्यूबिक मीटर से ज्यादा गैस का उत्पादन होता है जिसका दो तिहाई हिस्सा ONGC का है।

प्राकृतिक गैस की कीमतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत 3.50 डॉलर प्रति मिलियन मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट करने का फैसला कर लिया है। इसका सीधा असर गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी और घरों में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी पर पड़ेगा। इस साल की शुरुआत में सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत 6 फीसदी, 3.06 डॉलर प्रति मिलियन मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट बढ़ा दी, जो कि छह महीने के लिए अप्रैल-सितंबर 2018 के लिए लागू है। सीएनबीसी आवाज के मुताबिक संशोधित कीमतें सरकार के फॉर्मूले और ग्रोस कैलोरिफिक वेल्यू बेसिस पर आधारित होंगी। 15% की बढ़ोतरी वास्तव में बहुत है और प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की पूरी संभावना है। इससे पीएनजी (पाइप घरेलू घरेलू गैस) और सीएनजी (ऑटो ईंधन) का इस्तेमाल करने वाले रिटेल फ्यूल डिस्ट्रीब्यूटर्स, फर्टीलाइजर और पावर कंपनी पर दवाब पड़ेगा।

फर्टिलाइजर और बिजली कंपनियां देश में उत्पादित होने वाली गैस खरीदने के अलावा एलएनजी (लिक्यूफाइड नेचुरल गैस) भी इंपोर्ट करती हैं। सरकार ने घरेलू क्षेत्रों में उत्पादित प्राकृतिक गैस की कीमत निर्धारित करने के लिए अक्टूबर 2014 में एक नए फॉर्मूला को मंजूरी दे दी थी। इसमें यूके (हेनरी हब), यूके (नेशनल बैलेंसिंग प्वाइंट) कनाडा (अल्बर्टा) और रूस में कीमतों के आधार पर हर छह महीने में इसे संशोधित किया जाता है।

ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के मुनाफे को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक गैस की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी देखी गई है। हाल ही में जेफरीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गैस कारोबार का योगदान राजस्व और परिचालन में कम है, लेकिन 1 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू बढ़ने से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के शेयर में कम से कम 10 फीसदी तक की कमाई बढ़ जाएगी। ओएनजीसी देश का सबसे बड़ा गैस उत्पादक है। करीब कुल 70 मिलियन क्यूबिक मीटर से ज्यादा गैस का उत्पादन होता है जिसका दो तिहाई हिस्सा ONGC का है।

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