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फॉक्सवॉगन को चेतावनी- शाम तक 100 करोड़ जमा कराएं, वरना हो सकती है एमडी की गिरफ्तारी, संपत्‍ति जब्‍त

Volkswagen scandal in India: एनजीटी के एक पैनल ने कंपनी पर भारत में स्वास्थय को नुकसान पहुंचाने के खिलाफ 171.34 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी।

Author Updated: January 17, 2019 12:43 PM
कंपनी ने अपनी डीजल कारों में कार्बन उत्सर्जन के डेटा में गड़बड़ी करने वाला एक सॉफ्टवेयर डाला था।

देश में फॉक्सवॉगन की मुश्किल बढ़ती जा रही हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आज (17 जनवरी) फॉक्सवैगन को कार्बन उत्सर्जन मामले में आज शाम 5 बजे तक 100 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है तो कार निर्माता को देश के एमडी की गिरफ्तारी और भारत में सभी संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। आपको बता दें कि एनजीटी के एक पैनल ने कंपनी पर भारत में स्वास्थय को नुकसान पहुंचाने के खिलाफ 171.34 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी। दरअसल कंपनी ने अपनी डीजल कारों में कार्बन उत्सर्जन के डेटा में गड़बड़ी करने वाला एक सॉफ्टवेयर डाला था। इसके बाद कंपनी को अमेरिका में मानकों को पूरा नहीं करने का दोषी पाया गया। जब यह बात विश्व स्तर पर आई तो इसके हालात कुछ और थे। इसमें पाया गया कि या 40 गुना तक ज्यादा नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन कर रहे थे।

विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि फाक्सवैगन की कारों ने राष्ट्रीय राजधानी में 2016 में लगभग 48.68 टन एनओएक्स उत्सर्जन किये। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अतिरिक्त एनओएक्स उत्सर्जन के कारण स्वास्थ्य को नुकसान हुआ और दिल्ली जैसे महानगरों को आधार मानते हुए मूल्य के हिसाब से यह नुकसान करीब 171.34 करोड़ रुपये का है। यह आंकड़ा मोटा-मोटा हो सकता है। इसका कारण देश में पर्यावरण पर नाइट्रोजन आक्साइड के कुल प्रभाव के आकलन के तरीकों का अभाव होना है। इसीलिए केवल स्वास्थ्य नुकसान का आकलन किया गया है।

नाइट्रोजन आक्साइड वायु प्रदूषित करता है और यह हृदय और फेंफड़े की बीमारी का कारण है। चार सदस्यीय समिति में एआरएआई (आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया) की निदेशक रश्मि उर्द्धवर्शी, सीएसआईआर-एनईईआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डा. नितिन लाभसेतवार, भारी उद्योग मंत्रालय में निदेशक रामाकांत सिंह तथा सीपीसीबी के सदस्य सचिव प्रशांत गरगवा हैं। एनजीटी ने इस मामले में सुझाव देने के लिये समिति का गठन पिछले साल 16 नवंबर को किया। समिति को इस बात पर विचार करने की जिम्मेदारी दी गयी थी कि क्या विनिर्माता ने निर्धारित पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं किया। साथ ही इससे पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करने को कहा गया था।

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